Himachal Pradesh Flood : जब विज्ञान और सरकार सब फेल हुए, तो अपनी देवी की शरण में पहुँचे हिमाचल के लोग

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जब आसमान से बरसती आफत आपकी पूरी दुनिया उजाड़ दे, जब उफनती नदियां आपके घर-बार को निगल जाएं और जब टूटते पहाड़ ज़िंदगी की उम्मीदों को ही खत्म कर दें, तब इंसान क्या करे? देवभूमि हिमाचल के लोग आज इसी सवाल से जूझ रहे हैं। कुदरत के भयानक कहर के आगे जब सारी कोशिशें નાકામ लगने लगीं, तो बेबस और हताश लोग अपनी आराध्य देवी की शरण में पहुँच गए।

यह तस्वीरें मनाली के प्रसिद्ध हिडिम्बा माता मंदिर की हैं, जहाँ सैकड़ों स्थानीय लोग, महिलाएँ और पुरुष, आँखों में आँसू और दिल में उम्मीद लिए अपनी देवी से गुहार लगाने पहुँचे। उनके हाथों में पूजा की थाली थी और ज़ुबान पर बस एक ही प्रार्थना - "हे माँ, अब तू ही इस संकट से बचा। हमारे घरों को, हमारे बच्चों को और हमारे इस प्रदेश को बचा ले।"

यह कोई आम पूजा नहीं थी, यह उस बेबसी का शोर था जो प्रकृति के क्रोध के सामने गूंज रहा था। हिमाचल के लोगों की हिडिम्बा माता में अटूट आस्था है। वे उन्हें सिर्फ एक देवी नहीं, बल्कि अपनी रक्षक और अपनी कुलदेवी मानते हैं। उनका विश्वास है कि जब सारी दुनिया उनका साथ छोड़ देगी, तब भी उनकी माता उन्हें इस मुसीबत से ज़रूर बाहर نکالेंगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा भयानक मंज़र अपनी ज़िंदगी में पहले कभी नहीं देखा। लगातार हो रही बारिश और बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सड़कें टूट गई हैं, पुल बह गए हैं और कई गाँव पूरी तरह से कट चुके हैं। ऐसे में जब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने अपनी परंपरा और अपनी आस्था का दामन थाम लिया।

यह घटना दिखाती है कि तकनीक और विकास चाहे हमें कितना भी आगे ले जाएँ, लेकिन जब इंसान प्रकृति के सामने लाचार होता है, तो उसे सुकून और हिम्मत अपनी जड़ों और अपनी आस्था में ही मिलती है। अब सबकी निगाहें आसमान पर और उम्मीदें अपनी देवी हिडिम्बा पर टिकी हैं, कि शायद उनकी पुकार सुन ली जाए।