रांची की सड़कों पर हाई कोर्ट सख्त कब तक ठीक होंगे गड्ढे? सरकार से एक हफ्ते में मांगा जवाब
News India Live, Digital Desk : झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रांची शहर की जर्जर सड़कों और जल निकासी (Drainage) की गंभीर स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। गुरुवार (5 फरवरी 2026) को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह एक शपथ पत्र (Affidavit) के माध्यम से बताए कि शहर की सड़कों की मरम्मत का काम कब तक पूरा किया जाएगा।
1. कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और निर्देश
अदालत ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए शहर की बदहाली पर निम्नलिखित बिंदु उठाए:
मरम्मत की समय-सीमा: कोर्ट ने पूछा कि सरकार और नगर निगम के पास जर्जर सड़कों को दुरुस्त करने के लिए क्या 'डेडलाइन' है?
शपथ पत्र का निर्देश: राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर यह बताने के लिए कहा गया है कि किन-किन सड़कों पर काम शुरू हुआ है और कौन सी योजनाएं अभी भी कागजों पर हैं।
नगर निकाय चुनाव का संदर्भ: कोर्ट ने यह भी नोट किया कि नगर निकाय चुनाव के दौरान सड़कों की स्थिति और बुनियादी सुविधाएं जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं।
2. किन इलाकों की स्थिति सबसे बदतर?
याचिकाकर्ता और कोर्ट के संज्ञान में लाए गए विवरण के अनुसार, रांची के लगभग 50,000 लोग बुनियादी सड़क और ड्रेनेज के बिना रहने को मजबूर हैं। सबसे खराब स्थिति वाले इलाके हैं:
बरियातू, रातू रोड, और बिरसा चौक।
हरमू रोड, किशोरगंज, और मोरहाबादी।
कांके रोड, डोरंडा, पुंदाग, और अरगोड़ा।
विशेष उल्लेख: अर्गोड़ा से नया सराय मार्ग और राजेंद्र नगर, सिद्धिविनायक नगर जैसी कॉलोनियों में स्थिति बेहद नारकीय है।
3. जल निकासी (Sewerage & Drainage) पर भी सवाल
सड़कों के साथ-साथ शहर की सीवरेज व्यवस्था पर भी कोर्ट ने जवाब मांगा है। अदालत को बताया गया कि हल्की बारिश में भी शहर के मुख्य मार्ग और गलियां तालाब बन जाती हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। कोर्ट ने नगर विकास विभाग और पथ निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से इस समस्या का समाधान निकालने को कहा है।
4. अगली सुनवाई: 26 फरवरी
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है। उस दिन सरकार को अपनी प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) पेश करनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक प्रगति नहीं दिखी, तो अधिकारियों के खिलाफ सख्त आदेश पारित किए जा सकते हैं।