यूक्रेन युद्ध का हीरो अब भारतीय सेना के पास ,अमेरिका ने दी 93 मिलियन डॉलर के इस ब्रह्मास्त्र को मंजूरी
News India Live, Digital Desk: क्या आपको यूक्रेन युद्ध की तस्वीरें याद हैं? वहां रूसी टैंकों के परखच्चे उड़ाने वाली एक खास मिसाइल ने सबका ध्यान खींचा था। जी हां, हम बात कर रहे हैं FGM-148 Javelin Missile की। अब यही 'टैंक किलर' भारतीय सेना के तरकश में शामिल होने वाला है। अमेरिका ने भारत को करीब 93 मिलियन डॉलर (यानी करोड़ों रुपये) के सैन्य साजो-सामान बेचने पर अपनी मुहर लगा दी है।
यह खबर सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं है, बल्कि सीमाओं पर बदलती चुनौतियों का जवाब है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह डील इतनी खास क्यों है और इससे भारत को क्या फायदा होगा।
आखिर जैवलिन मिसाइल में इतना डर क्यों है?
अक्सर जब हम हथियारों की बात करते हैं, तो तकनीक सबसे ज्यादा मायने रखती है। जैवलिन को दुनिया का सबसे भरोसेमंद एंटी-टैंक हथियार माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है— "Fire and Forget" यानी दागो और भूल जाओ। सैनिक को मिसाइल लॉन्च करने के बाद वहां रुकने की जरूरत नहीं होती, मिसाइल अपने आप टारगेट यानी दुश्मन के टैंक का पीछा करती है और उसे बर्बाद कर देती है।
यह मिसाइल टैंक के उस हिस्से पर हमला करती है जहां उसका कवच (armor) सबसे कमजोर होता है—यानी उसका ऊपरी हिस्सा। इसी वजह से इसे 'टैंकों का काल' कहा जाता है। पहाड़ी इलाकों और दुर्गम सीमाओं के लिए यह एक बेहतरीन हथियार है।
डील में भारत को क्या-क्या मिलेगा?
इस India US Defence Deal के तहत, भारतीय सेना को सिर्फ मिसाइलें ही नहीं मिलेंगी, बल्कि अमेरिका इसके साथ 'लॉन्च कमांड यूनिट्स' भी देगा। आसान शब्दों में कहें तो, ये वो सिस्टम है जिससे मिसाइल चलाई जाती है। साथ ही, सैनिकों की ट्रेनिंग और रखरखाव का भी पूरा इंतजाम इस डील में शामिल है। पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) का मानना है कि इस समझौते से भारत-अमेरिका के रिश्ते तो मजबूत होंगे ही, साथ ही दक्षिण एशिया में स्थिरता भी बनी रहेगी।
चीन और पाकिस्तान सीमा के लिए क्यों जरूरी?
हम सब जानते हैं कि लद्दाख जैसी ऊंची चोटियों और रेगिस्तानी इलाकों में हमारी सेना को हमेशा चौकन्ना रहना पड़ता है। Indian Army capabilities को बढ़ाने में यह डील बहुत काम आएगी। जिस तरह से चीन अपनी तरफ बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों की संख्या बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए जैवलिन जैसी हल्की और सटीक मार करने वाली मिसाइल हमारे जवानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसे एक जवान भी कंधे पर रखकर फायर कर सकता है, जो पहाड़ी लड़ाई में बहुत बड़ा फायदा देता है।
भारत का आत्मनिर्भर भारत मिशन और विदेशी मदद
भले ही भारत अपने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' की ओर तेजी से बढ़ रहा है और हम अपने हथियार खुद बना रहे हैं, लेकिन तत्कालिक जरूरतों और दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी को सेना में शामिल करना भी समझदारी है। यह सौदा बताता है कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहता।
कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि इस अमेरिकी 'टैंक किलर' के आने से भारतीय सेना की ताकत में गजब का इजाफा होगा। सरहद पार बैठे दुश्मनों को अब अपनी बख्तरबंद गाड़ियों को आगे बढ़ाने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा।