हेमंत सोरेन का बड़ा वार, झारखंड में अब कैंसर की दवाओं पर मनमाना मुनाफा नहीं कमा पाएंगे लोग

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News India Live, Digital Desk : कैंसर इस बीमारी का नाम सुनते ही आम आदमी की रूह कांप जाती है। डर सिर्फ़ मौत का नहीं होता, डर इस बात का भी होता है कि इलाज का खर्चा कैसे निकलेगा? अक्सर देखा गया है कि इलाज कराते-कराते परिवारों की जमा-पूंजी खत्म हो जाती है, जमीनें बिक जाती हैं और लोग कर्ज में डूब जाते हैं।

लेकिन झारखंड के लोगों के लिए, और खासकर उन परिवारों के लिए जो इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं, एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी तारीफ हर जगह हो रही है। उन्होंने साफ़ कर दिया है कि झारखंड में कैंसर की दवाओं पर मुनाफाखोरी (Profiteering) यानी 'लूट-खसोट' अब नहीं चलेगी।

क्या है सीएम का आदेश?

सीएम हेमंत सोरेन ने एक बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि दवा बेचना सेवा का काम है, लेकिन कुछ लोग इसे सिर्फ पैसा बनाने का मशीन समझ बैठे हैं।
खबर यह है कि उन्होंने राज्य में कैंसर की दवाओं के MRP (Maximum Retail Price) और बिक्री के तरीकों पर नजर रखने और 'अंधाधुंध मुनाफे' पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

सीएम ने सीधे शब्दों में कहा कि एक तो बीमारी जानलेवा, ऊपर से दवाइयों के दाम इतने ज्यादा कि गरीब आदमी हिम्मत ही हार जाए—यह अब झारखंड में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मरीज की मजबूरी का फायदा क्यों?

अक्सर हम देखते हैं कि कैंसर के कुछ इंजेक्शन या दवाएं जो थोक में कम दाम में मिलती हैं, उन्हें रिटेलर मरीजों को कई गुना दाम बढ़ाकर बेचते हैं। चूंकि मरीज के पास कोई और रास्ता नहीं होता, वो अपनी मजबूरी में मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हो जाता है।
हेमंत सोरेन सरकार इसी "मार्जिन" (Profit Margin) को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। ताकि जो फायदा बिचौलिए खा रहे हैं, वो छूट मरीज को मिल सके।

सस्ते इलाज की दिशा में कदम

सिर्फ मुनाफाखोरी रोकना ही नहीं, सरकार की मंशा है कि राज्य के नागरिकों को बेहतरीन इलाज मिले और वो भी कम खर्चे में। यह कदम इसलिए भी जरूरी था क्योंकि कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और हर परिवार लाखों का खर्च नहीं उठा सकता।

अब अधिकारियों पर होगी जिम्मेदारी

सीएम के इस आदेश के बाद अब स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को एक्शन में आना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी मेडिकल स्टोर या अस्पताल में कैंसर की दवा तय कीमत से ज्यादा या गलत मार्जिन जोड़कर न बेची जा रही हो।

अगर यह आदेश सही से लागू हो गया, तो यकीन मानिए हजारों परिवारों के आंसू पोंछने का काम करेगा। वाकई, जब सरकार जनता के दुख-दर्द को समझकर फैसले लेती है, तो आम आदमी को लगता है कि “कोई है जो हमारा ख्याल रखता है।”