Monsoon Pimple Control Tips: जानिए मानसून में पिंपल्स रोकने के 5 सबसे असरदार तरीके और होममेड उपाय
गर्मी के मौसम से राहत दिलाने वाली बारिश हर किसी के मन को भाती है, लेकिन हवा में बढ़ी हुई नमी हमारी त्वचा के लिए तरह-तरह की मुश्किलें खड़ी कर देती है। मानसून की शुरुआत होते ही वातावरण में ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर काफी ज्यादा हो जाता है। यह नमी हमारी त्वचा में मौजूद सीबेशियस ग्लैंड्स (तेल ग्रंथियों) को अत्यधिक सक्रिय कर देती है, जिससे चेहरे पर सीबम यानी प्राकृतिक तेल का उत्पादन दोगुना होने लगता है। जब यह अतिरिक्त तेल हवा में मौजूद धूल-मिट्टी, पसीने और डेड स्किन सेल्स के साथ मिलता है, तो त्वचा के छोटे-छोटे पोर्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि चेहरे पर अचानक लाल, दर्दनाक और जिद्दी मुंहासे (Breakouts) निकलने लगते हैं। इस मौसम में अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो पिंपल्स की यह समस्या पूरे चेहरे पर फैल सकती है।
मानसून में मुंहासों का मुख्य कारण: जानिए क्यों बारिश में अचानक बेकाबू हो जाते हैं पिंपल्स?
बारिश के मौसम में पिंपल्स बढ़ने की सबसे बड़ी वजह नमी वाले माहौल में बैक्टीरिया और फंगस का तेजी से पनपना है। इस मौसम में 'क्यूटिबैक्टीरियम एक्नेस' (Cutibacterium acnes) नाम का बैक्टीरिया बहुत तेजी से ग्रोथ करता है। बंद पोर्स के अंदर फंसा पसीना और सीबम इस बैक्टीरिया के लिए एक मुफीद जगह बना देता है, जिससे त्वचा में सूजन (Inflammation), रेडनेस और मवाद वाले पिंपल्स उभर आते हैं। इसके साथ ही, बारिश के दूषित पानी में मौजूद केमिकल्स और पॉल्यूशन स्किन के नेचुरल बैरियर को नुकसान पहुंचाते हैं। कई लोग चेहरे की चिपचिपाहट से घबराकर बार-बार कड़े साबुन से चेहरा धोने लगते हैं। ऐसा करने से त्वचा का जरूरी मॉइश्चर छिन जाता है और स्किन खुद को बचाने के लिए और अधिक तेल बनाने लगती है, जिससे समस्या घटने के बजाय बढ़ जाती है।
डबल क्लींजिंग और सैलिसिलिक एसिड: मुंहासों का काम तमाम करने वाले पावरफुल हथियार
मानसून में पिंपल्स को रोकने के लिए सबसे पहला और प्राथमिक नियम है एक सही क्लींजिंग रूटीन को फॉलो करना। इस मौसम में दिन में दो बार अपने चेहरे को किसी जेंटल और एक्टिव-बेस्ड फेसवॉश से जरूर साफ करें। अगर आपकी स्किन ऑयली और एक्ने-प्रोन है, तो सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid), टी-ट्री ऑयल या नीम युक्त फेसवॉश का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद होता है। सैलिसिलिक एसिड ऑयल-सोल्यूबल होता है, जो पोर्स के गहराई में जाकर जमा हुए तेल और बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। रात को सोने से पहले मिसेलर वाटर से चेहरे की 'डबल क्लींजिंग' जरूर करें ताकि दिनभर का पसीना, सनस्क्रीन और धूल-मिट्टी पूरी तरह साफ हो जाए।
ऑयल-फ्री और जेल मॉइश्चराइजर: पोर्स को बंद किए बिना त्वचा को दें सही हाइड्रेशन
मानसून में लोग अक्सर यह सोचकर मॉइश्चराइजर लगाना बंद कर देते हैं कि चेहरा तो पहले से ही ऑयली और चिपचिपा है। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है जो मुंहासों को और ज्यादा बढ़ावा देती है। जब आप त्वचा को बाहर से मॉइश्चराइज नहीं करते, तो स्किन डिहाइड्रेट होकर अतिरिक्त सीबम बनाने लगती है। इस मौसम में भारी क्रीम या गाढ़ी कोल्ड क्रीम के बजाय लाइटवेट, वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid), एलोवेरा जेल और नियासिनामाइड (Niacinamide) युक्त मॉइश्चराइजर पोर्स को ब्लॉक किए बिना त्वचा में नमी को सील करते हैं और पिंपल्स के दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करते हैं।
एंटी-बैक्टीरियल फेस पैक: नीम, मुल्तानी मिट्टी और टी-ट्री ऑयल का चमत्कारी असर
अगर मानसून में आपके चेहरे पर छोटे-छोटे पिंपल्स या दाने निकलने लगे हैं, तो प्राकृतिक और एंटी-बैक्टीरियल घरेलू नुस्खे आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी चेहरे के अत्यधिक तेल को सोखने में माहिर होती है, वहीं नीम में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक चम्मच नीम का पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इसे हफ्ते में 2 बार चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं। इसके अलावा, शुद्ध टी-ट्री ऑयल की 1-2 बूंदों को एलोवेरा जेल में मिलाकर सीधे पिंपल के ऊपर (Spot Treatment) लगाने से मुंहासे की सूजन और दर्द रातभर में काफी कम हो जाता है।
खान-पान, तकिए का कवर और छोटी गलतियां: पिंपल्स से बचने के लिए तुरंत बदलें ये आदतें
केवल बाहरी प्रोडक्ट्स लगाने से ही पिंपल्स नहीं रुकते, बल्कि आपकी दैनिक लाइफस्टाइल का भी इस पर सीधा असर पड़ता है। मानसून के सुहाने मौसम में अक्सर समोसे, पकौड़े और डीप-फ्राई स्ट्रीट फूड खाने की इच्छा होती है। अत्यधिक तैलीय और मसालेदार खाना पचने में भारी होता है और शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाता है, जिससे सीधे चेहरे पर पिंपल्स निकलने लगते हैं। इसलिए अपनी डाइट में ताजा नारियल पानी, खीरा, तरबूज और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें। इसके साथ ही अपने तकिए के कवर (Pillow Cases) और तौलिए को हर 2-3 दिन में धोएं, क्योंकि इनमें जमा नमी बैक्टीरिया का घर बन जाती है। अपने चेहरे को बार-बार गंदे हाथों से न छुएं और पिंपल्स को कभी भी फोड़ने की गलती न करें।