महिलाओं की सेहत: मेनोपॉज के बाद शरीर का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा होता है प्रभावित? जानिए डॉक्टरों की चौंकाने वाली राय
महिलाओं की जिंदगी में 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज (Menopause) एक स्वाभाविक जैविक पड़ाव है, जो मासिक धर्म चक्र (Periods) के हमेशा के लिए बंद होने का संकेत देता है। जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते, तो चिकित्सकीय रूप से इसे मेनोपॉज माना जाता है। हालांकि इसे उम्र बढ़ने की एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके बाद महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव किसी चक्रवात से कम नहीं होते।
मेनोपॉज के दौरान अंडाशय (Ovaries) से मुख्य महिला सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है। एस्ट्रोजन सिर्फ प्रजनन क्षमता को ही नहीं संभालता, बल्कि यह पूरे शरीर में हड्डियों, दिल, त्वचा, रक्त वाहिकाओं और मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यही कारण है कि इसका स्तर अचानक गिरने पर शरीर का लगभग हर हिस्सा प्रभावित होता है, लेकिन एक हिस्सा ऐसा है जो सबसे तेजी से और सबसे गंभीर रूप से खोखला होने लगता है।
शरीर का सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्सा: कमजोर होती हड्डियां और कंकाल तंत्र
स्त्री रोग विशेषज्ञों और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, मेनोपॉज के बाद जिस अंग प्रणाली पर सबसे गहरा और अपरिवर्तनीय आघात होता है, वह है महिला का कंकाल तंत्र यानी हड्डियां (Bones & Skeletal System)।
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एस्ट्रोजन की सुरक्षा का खात्मा: एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों के निर्माण और उनके पुनर्चक्रण में संतुलन बनाए रखता है। यह पुरानी हड्डियों को नष्ट करने वाली कोशिकाओं (Osteoclasts) को नियंत्रित रखता है। एस्ट्रोजन घटते ही हड्डियां बनने की गति से कहीं ज्यादा तेजी से गलने और टूटने लगती हैं।
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बोन मास में 20% तक की भारी गिरावट: मेडिकल रिसर्च के अनुसार, मेनोपॉज के शुरुआती 5 से 7 वर्षों के भीतर महिलाएं अपने जीवनकाल का लगभग 20% बोन मिनरल डेंसिटी (हड्डियों का घनत्व) खो देती हैं।
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साइलेंट किलर 'ऑस्टियोपोरोसिस' (Osteoporosis): हड्डियां अंदर से स्पंज की तरह खोखली और छिद्रयुक्त हो जाती हैं। इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इस अवस्था में महिला को तब तक पता नहीं चलता जब तक कि मामूली रूप से फिसलने, खांसने या झुकने पर भी रीढ़ की हड्डी, कूल्हे (Hip) या कलाई में गंभीर फ्रैक्चर न हो जाए।
दिल से लेकर प्राइवेट पार्ट्स तक: इन अंगों पर भी पड़ता है सीधा असर
हड्डियों के अलावा एस्ट्रोजन की कमी से शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर भी व्यापक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है:
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1. दिल और रक्त वाहिकाएं (Cardiovascular System): मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन महिलाओं की रक्त वाहिकाओं को लचीला रखता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नियंत्रित रखता है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा पुरुषों के बराबर पहुंच जाता है।
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2. वजाइना और यूरिनरी ट्रैक्ट (GSM): प्राइवेट पार्ट्स की दीवारों का पतला और सूखा होना (Vaginal Dryness), जलन और बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) होना आम हो जाता है। इसे जेनिटोयूरिनरी सिंड्रोम ऑफ मेनोपॉज कहा जाता है।
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3. मेटाबॉलिज्म और वजन बढ़ना: मेटाबॉलिक रेट धीमा हो जाता है, जिससे कमर और पेट के आसपास की चर्बी (Visceral Fat) तेजी से बढ़ती है और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
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4. ब्रेन और मानसिक स्वास्थ्य: मेनोपॉज के कारण ब्रेन फॉग (भूलने की बीमारी), एकाग्रता में कमी, अनिद्रा (Insomnia), अचानक तेज गर्मी लगना (Hot Flashes) और मूड स्विंग्स या डिप्रेशन की समस्या होने लगती है।
मेनोपॉज के बाद हड्डियों और सेहत को मजबूत रखने के 5 अचूक उपाय
डॉक्टरों का मानना है कि सही जीवनशैली, संतुलित खानपान और समय पर मेडिकल जांच से मेनोपॉज के बाद भी जीवन को स्वस्थ और सक्रिय बनाया जा सकता है:
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डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) कराएं: 45 या 50 की उम्र के बाद या मेनोपॉज होते ही अपने डॉक्टर से सलाह लेकर 'बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट' (DEXA Scan) कराएं, ताकि हड्डियों के घनत्व का सटीक पता चल सके।
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कैल्शियम और विटामिन डी3 का सेवन: रोजाना कम से कम 1200 मिलीग्राम कैल्शियम और 800 से 1000 IU विटामिन डी3 की जरूरत होती है। दूध, दही, पनीर, रागी, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम और तिल को डाइट में शामिल करें तथा सुबह की धूप में समय बिताएं।
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वेट-बेयरिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज: हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए ब्रिस्क वॉक, सीढ़ियां चढ़ना, हल्का वजन उठाना और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह हड्डियों की कोशिकाओं को सक्रिय रखता है।
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हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) पर विचार: यदि हॉट फ्लैशेज और हड्डियों की कमजोरी बहुत ज्यादा गंभीर है, तो डॉक्टर की कड़ी निगरानी में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ली जा सकती है।
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नमक, कैफीन और धूम्रपान से दूरी: अत्यधिक नमक और कैफीन यूरिन के रास्ते कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा देते हैं, जिससे हड्डियां तेजी से कमजोर होती हैं। इसलिए प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चाय-कॉफी से परहेज करें।