तेलंगाना के पलवंचा में बप्पा का अद्भुत रूप: 2.9 करोड़ के असली नोटों से सजे दो भव्य पंडाल

तेलंगाना के पलवंचा में बप्पा का अद्भुत रूप: 2.9 करोड़ के असली नोटों से सजे दो भव्य पंडाल

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य से आई एक खबर ने पूरे देश के श्रद्धालुओं और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के प्रमुख औद्योगिक कस्बे पलवंचा में इस साल बप्पा के स्वागत की ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। यहां दो प्रमुख उत्सव समितियों ने गणपति बप्पा के दो अलग-अलग भव्य पंडालों को भारतीय रिजर्व बैंक की असली करेंसी से सजाया है। दोनों पंडालों में इस्तेमाल की गई नकद राशि कुल मिलाकर 2.90 करोड़ रुपये बैठती है। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों पर प्रसारित हुई, बप्पा के इस चमत्कारी और नयनाभिराम स्वरूप का दर्शन पाने के लिए तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की भारी कतारें लगने लगीं।

कापू समुदाय और टीम एकदंत की भव्य पहल: 1.4 करोड़ और 1.5 करोड़ की नकदी से श्रृंगार

पलवंचा शहर में स्थापित इन दोनों पंडालों की भव्यता और शिल्प कौशल देखते ही बनता है। पहले पंडाल का जिम्मा स्थानीय ‘कापू समुदाय’ के उत्साही सदस्यों और युवाओं ने संभाला था। इन्होंने अपनी गणपति प्रतिमा और पूरे गर्भगृह के परिवेश को लगभग 1.4 करोड़ रुपये के बिल्कुल नए व करारे नोटों की लड़ियों से सुसज्जित किया। वहीं, शहर के दूसरे हिस्से में ‘टीम एकदंत’ नामक धार्मिक व सामाजिक संगठन ने एक कदम आगे बढ़कर विघ्नहर्ता की प्रतिमा और मुख्य झांकी को 1.5 करोड़ रुपये की प्रामाणिक नकदी से भव्य स्वरूप प्रदान किया। जब दोनों पंडालों की नकदी जोड़ी गई, तो यह आंकड़ा 2.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पंडाल के भीतर प्रवेश करते ही चारों ओर रंग-बिरंगे भारतीय नोटों की जगमगाहट देखने को मिल रही है, जिसे देखने वाला हर श्रद्धालु श्रद्धा और विस्मय से भर जाता है।

10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोटों का बेजोड़ संगम: कारीगरों की अद्भुत कला

इस भव्य सजावट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल एक वर्ग के बड़े नोट ही नहीं, बल्कि भारतीय मुद्रा के सभी प्रमुख मूल्यवर्गों का उपयोग कलात्मक ढंग से किया गया है। कारीगरों ने 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 200 रुपये और 500 रुपये के ताजे व चमचमाते नोटों को इस कुशलता से पिरोया है कि यह किसी उत्कृष्ट रेशमी वस्त्र या सोने-चांदी के आभूषण का आभास कराता है। भगवान गणेश का विशाल मुकुट, उनका भव्य हार, बाजूबंद और यहां तक कि सिंहासन के पीछे का संपूर्ण प्रभामंडल भी असली नोटों की लताओं से तैयार किया गया है। कारीगरों ने यह विशेष सावधानी बरती कि सजावट के दौरान किसी भी नोट पर स्टेपलर या गोंद का ऐसा प्रयोग न हो जिससे मुद्रा को किसी भी प्रकार का भौतिक नुकसान पहुंचे।

स्थानीय व्यापारियों और बैंकों की भागीदारी: कड़ी सुरक्षा के बीच उमड़ा भक्तों का सैलाब

इतनी बड़ी मात्रा में नकदी को एक सार्वजनिक पंडाल में प्रदर्शित करना अपने आप में एक बड़ा साहसिक और प्रशासनिक कदम है। आयोजकों ने बताया कि इस भव्य और अद्वितीय सजावट के लिए आवश्यक धनराशि स्थानीय प्रतिष्ठित व्यापारियों, श्रद्धालुओं और कारोबारियों के आपसी सहयोग व अमानत के रूप में जुटाई गई थी। ‘गजपति’ स्वरूप की मूर्ति के पंडाल के लिए स्थानीय राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों ने विशेष आग्रह पर नए, बिना मुड़े हुए फ्रेश नोटों की गड्डियां उपलब्ध कराईं। इतनी भारी नकदी खुले में होने के कारण पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रखी गई है। पंडाल परिसरों में चौबीसों घंटे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है, निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है और स्थानीय पुलिस प्रशासन भी लगातार इलाके में पेट्रोलिंग बनाए हुए है ताकि दर्शनार्थियों को सुगमता रहे और सुरक्षा में कोई चूक न हो।

पलवंचा की अनोखी परंपरा: पिछले वर्षों में भी नोटों से महका था बप्पा का दरबार

पलवंचा कस्बे के लिए नोटों से भगवान श्रीगणेश का श्रृंगार करने की यह रीत कोई पहली बार नहीं देखी जा रही है, बल्कि यह धीरे-धीरे यहां की एक प्रसिद्ध स्थानीय परंपरा का रूप ले चुकी है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में भी कापू संगम गणेश उत्सव समिति ने शहर के अंबेडकर सेंटर पर स्थापित बप्पा की मूर्ति और विशाल मंच को 1.1 करोड़ रुपये के नए नोटों से सजाकर सुर्खियां बटोरी थीं, जबकि उस दौरान मंच सज्जा में अतिरिक्त 1.5 करोड़ रुपये का संयोजन देखा गया था। वहीं, साल 2023 में भी 1 करोड़ रुपये की नकद राशि से बप्पा का पंडाल सजाया गया था। हर साल इस राशि और भव्यता का दायरा बढ़ता जा रहा है, जिसने पलवंचा को राज्य के नक्शे पर एक अनोखे धार्मिक पर्यटन और आकर्षण केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।