काम में लापरवाही पड़ी भारी: NTPC ने GR Infraprojects का ₹413 करोड़ का बैटरी स्टोरेज कॉन्ट्रैक्ट किया रद्द, ₹91 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त
भारत की महारत्न ऊर्जा उत्पादक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC) ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (GR Infraprojects) के खिलाफ सख्त संविदात्मक कार्रवाई करते हुए 413.37 करोड़ रुपये के एक बड़े बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट का अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह उच्च-स्तरीय परियोजना महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित एनटीपीसी के प्रतिष्ठित मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (Mouda Super Thermal Power Station) परिसर में स्थापित की जानी थी, जिसकी कुल ऊर्जा संचयन क्षमता 400 मेगावाट-घंटा (MWh) तय की गई थी। सार्वजनिक क्षेत्र के ऊर्जा उपक्रम ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध की आवश्यक शर्तों, समय-सीमा के अनिवार्य माइलस्टोन्स और तकनीकी जिम्मेदारियों को निर्धारित मानक के अनुसार पूरा न कर पाने के कारण यह कठोर कदम उठाया गया है।
मार्च 2026 में 15 महीने की मियाद पर मिला था टेंडर: डेडलाइन और साइट कार्य में लगातार भारी देरी
एनटीपीसी ने मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन के भीतर ग्रिड-स्केल 400 MWh BESS परियोजना के इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) का यह कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2026 में जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को औपचारिक रूप से सौंपा था। अनुबंध की अनिवार्य शर्तों के अनुसार, ठेकेदार कंपनी को कार्य आदेश जारी होने की तिथि से ठीक 15 महीने के भीतर बैटरी स्टोरेज फैसिलिटी का पूरा ढांचा खड़ा कर उसे चालू करना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर प्रारंभिक सिविल निर्माण, आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति और सिस्टम डिजाइनिंग जैसी बेहद महत्वपूर्ण गतिविधियों में शुरुआत से ही अनावश्यक शिथिलता बरती गई और कार्य तय कार्यक्रम से काफी पीछे छूट गया।
सुधार नोटिस की अनदेखी पर कड़ा एक्शन: एनटीपीसी ने ₹91 करोड़ की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी भुनाई
एनटीपीसी के उच्चाधिकारियों के अनुसार, परियोजना में लगातार हो रही देरी को देखते हुए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को औपचारिक संविदात्मक नोटिस जारी कर कार्य की गति बढ़ाने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठेकेदार कंपनी ने साइट पर संसाधनों की संख्या नहीं बढ़ाई और न ही आपूर्ति शृंखला की बाधाओं को दूर करने की कोई ठोस योजना पेश की। इसके परिणामस्वरूप, सार्वजनिक धन और राष्ट्रीय ग्रिड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी ने अनुबंध को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही, संविदात्मक प्रावधानों के तहत जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स द्वारा जमा कराई गई करीब 91 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी और परफॉर्मेंस सिक्योरिटीज को भी एनटीपीसी ने तुरंत भुना लिया है।
'रिस्क एंड कॉस्ट' क्लॉज के तहत नया री-टेंडर: नुकसान की पूरी भरपाई जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स से होगी
एनटीपीसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मौदा 400 MWh BESS परियोजना को अधर में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि इसके शेष कार्यों को पूरा करने के लिए नए सिरे से री-टेंडरिंग की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दी गई है। यह नया टेंडर मूल अनुबंध के 'रिस्क एंड कॉस्ट' (ठेकेदार के जोखिम और लागत पर) क्लॉज के तहत जारी किया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि परियोजना को पूरा कराने के लिए यदि नए ठेकेदार को 413.37 करोड़ रुपये की मूल राशि से अधिक का भुगतान करना पड़ता है या प्रक्रिया में जो भी अतिरिक्त वित्तीय नुकसान होगा, उसकी पाई-पाई जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड से कानूनी तौर पर वसूली जाएगी।
क्या है 400 MWh मौदा BESS का सामरिक महत्व: बिजली ग्रिड का लचीलापन और ग्रीन एनर्जी संतुलन
महाराष्ट्र का मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन देश के पश्चिमी क्षेत्रीय बिजली ग्रिड को चौबीसों घंटे विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने वाला एक बेहद अहम केंद्र है। 400 MWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रिड के लचीलेपन (Grid Resilience) को बढ़ाना और सौर व पवन जैसे परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को पारंपरिक थर्मल पावर के साथ सुचारू रूप से एकीकृत करना है। दिन के समय उत्पादित अतिरिक्त सौर ऊर्जा को इन विशाल बैटरी पैक्स में संचित कर शाम के पीक-डिमांड घंटों में ग्रिड में छोड़ा जाना था। इस परियोजना में हो रही देरी सीधे तौर पर एनटीपीसी के हरित ऊर्जा परिवर्तन और ग्रिड स्थिरीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्रभावित कर रही थी।
थर्मल पावर स्टेशनों के साथ बैटरी स्टोरेज: एनटीपीसी का भविष्योन्मुखी रोडमैप
एनटीपीसी अपने मौजूदा पारंपरिक ताप विद्युत संयंत्रों के विशाल परिसरों और उपलब्ध ग्रिड सबस्टेशन कनेक्टिविटी का लाभ उठाते हुए कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना कर रहा है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे भारत की ऊर्जा टोकरी में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, ग्रिड फ्रीक्वेंसी को नियंत्रित रखने और अचानक बिजली कटौती को रोकने के लिए यूटिलिटी-स्केल बैटरी स्टोरेज अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। एनटीपीसी का लक्ष्य मौदा के शेष काम को नए सिरे से पारदर्शी और सक्षम वेंडर को सौंपकर इसे समय पर पूरा करना है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और 24x7 बिजली आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ मजबूती दी जा सके।