महिलाओं में भी चुपचाप बढ़ रहा है हाई कोलेस्ट्रॉल
आमतौर पर हमारे समाज में यह एक आम धारणा बनी हुई है कि हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या केवल पुरुषों को या फिर अधिक उम्र के बुजुर्गों को ही अपना शिकार बनाती है। लेकिन मेडिकल रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स के आंकड़े इस मिथक को पूरी तरह तोड़ते हुए चौंकाने वाला सच सामने लाते हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन, तनावपूर्ण कार्यशैली, बिगड़ी हुई खान-पान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते महिलाओं में भी 'साइलेंट किलर' यानी खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर चुपचाप तेजी से बढ़ने लगा है। शुरुआती दौर में महिलाओं के शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कोई खास या स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण इसे 'खामोश बीमारी' भी कहा जाता है। जब तक महिलाओं को इस समस्या का पता चलता है, तब तक यह धमनियों में जमकर दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का बड़ा खतरा पैदा कर चुका होता है। समय रहते शरीर के इन बारीक संकेतों को पहचानना हर महिला के लिए बेहद जरूरी है ताकि किसी भी बड़े खतरे से पहले सावधानी बरती जा सके।
आखिर क्यों महिलाओं में खतरनाक साबित हो रहा है बढ़ता हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल?
खराब कोलेस्ट्रॉल यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) जब खून की नसों (Arteries) में जमा होने लगता है, तो रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है। महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जो प्राकृतिक रूप से उनके दिल की रक्षा करता था। इसके बाद महिलाओं में भी पुरुषों की तरह हार्ट अटैक और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। इसके अलावा थायराइड की समस्या, पीसीओडी (PCOS), गर्भनिरोधक गोलियों का अत्यधिक सेवन, जेनेटिक कारण और जंक फूड का अंधाधुंध सेवन महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता है। चूंकि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग या बेहद सामान्य लग सकते हैं, इसलिए अक्सर वे इसे मामूली थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर भारी पड़ सकता है।
महिलाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती और सबसे अहम छिपे हुए संकेत
महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर हमेशा पैनी नजर रखनी चाहिए। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर कुछ छुपे हुए संकेत देने लगता है, जिन्हें भूलकर भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं उन प्रमुख लक्षणों के बारे में जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का संकेत देते हैं:
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लगातार और असाधारण थकान: यदि बिना किसी भारी काम के भी आपको हर समय शरीर में भारीपन और गंभीर थकान महसूस होती है, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन का संकेत हो सकता है।
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थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना: अगर सामान्य रूप से घर का काम करते हुए या थोड़े से कदमों पर सांस फूलने लगे और छाती में हल्का भारीपन लगे, तो सावधान हो जाएं।
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पैथोलॉजिकल जकड़न और पैरों में दर्द: पैरों की नसों में ठीक से खून न पहुंचने के कारण पिंडलियों में लगातार दर्द, ऐंठन या सुन्नपन (Numbness) महसूस होना हाई कोलेस्ट्रॉल की निशानी हो सकती है।
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त्वचा पर पीले चकत्ते या धब्बे (Xanthomas): आंखों के आसपास या शरीर के जोड़ों पर छोटे-छोटे पीले रंग की चर्बी के उभार दिखाई देना शरीर में अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल होने का प्रमाण है।
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त्वचा और नाखूनों के रंग में बदलाव: खराब रक्त संचार के कारण उंगलियों और पैर के पंजों का ठंडा पड़ जाना या नाखूनों का रंग फीका पड़ जाना भी एक बड़ा संकेत है।
समय रहते कैसे करें बचाव और कौन से टेस्ट कराना है जरूरी?
यदि आप इन लक्षणों को खुद में महसूस कर रही हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना शुरू कर दें। साल में कम से कम एक बार अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) जरूर करवाएं, जिसमें कुल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की सटीक जानकारी मिल जाती है। अपने आहार से ट्रांस फैट, रिफाइंड ऑयल, मैदे से बनी चीजें और जंक फूड को पूरी तरह बाहर कर दें। इसकी बजाय अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ओट्स, फल, अखरोट, बादाम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर बढ़ने लगता है और धमनियां साफ रहती हैं। समय पर सतर्कता अपनाकर आप अपने दिल को हमेशा स्वस्थ और सुरक्षित रख सकती हैं।