सेहत की बात: डायबिटीज में क्यों लगती है बार-बार प्यास? डॉक्टरों ने खोला 'पॉलीडिप्सिया' का राज, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बावजूद यदि आपका गला बार-बार सूख रहा है और होंठ पपड़ीदार हो रहे हैं, तो इसे केवल गर्म मौसम या सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विज्ञान में बार-बार अत्यधिक प्यास लगने की इस स्थिति को 'पॉलीडिप्सिया' (Polydipsia) कहा जाता है।
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स और फिजिशियन डॉक्टरों के अनुसार, पॉलीडिप्सिया टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज (Diabetes) दोनों का एक क्लासिक और बेहद आम लक्षण है। जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है या कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो रक्त में ग्लूकोज (ब्लड शुगर) की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ने लगती है। इस अतिरिक्त शुगर से निपटने के लिए शरीर के भीतर एक जटिल जैविक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसका सीधा परिणाम अनियंत्रित प्यास के रूप में सामने आता है।
डॉक्टरों ने समझाई वजह: किडनी और शुगर का खेल कैसे बढ़ाता है प्यास?
डॉक्टरों के मुताबिक, खून में अतिरिक्त ग्लूकोज और बार-बार लगने वाली प्यास के बीच सीधा जैविक संबंध है:
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किडनी पर बढ़ता अतिरिक्त दबाव: सामान्य स्थिति में हमारी किडनियां (गुर्दे) खून से ग्लूकोज को छानकर वापस शरीर में अवशोषित (Reabsorb) कर लेती हैं। लेकिन जब ब्लड शुगर लेवल 180 mg/dL या उससे अधिक हो जाता है, तो किडनी की अवशोषण क्षमता समाप्त हो जाती है।
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ऑस्मोटिक ड्यूरिसिस (Osmotic Diuresis): अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी इसे मूत्र (यूरिन) के रास्ते बाहर फेंकने लगती है। ग्लूकोज अपने साथ शरीर के ऊतकों (Tissues) से भारी मात्रा में पानी खींचता है, जिससे मरीज को बार-बार पेशाब आता है (जिसे पॉलीयूरिया कहते हैं)।
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डिहाइड्रेशन और ब्रेन का सिग्नल: बार-बार पेशाब जाने से शरीर में पानी की तीव्र कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। जैसे ही खून में पानी का स्तर घटता है, मस्तिष्क का 'हाइपोथैलेमस' (Hypothalamus) हिस्सा प्यास का अलार्म सक्रिय कर देता है, जिससे व्यक्ति को बार-बार बहुत ज्यादा पानी पीने की तलब महसूस होती है।
क्या सिर्फ प्यास लगना ही डायबिटीज है? इन अन्य लक्षणों पर भी रखें नजर
यदि आपको बार-बार प्यास लग रही है, तो उसके साथ शरीर में दिखने वाले इन अन्य चेतावनी संकेतों की जांच भी जरूर करें:
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पॉलिशुरिया (बार-बार पेशाब आना): विशेषकर रात के समय 3 से 4 बार या उससे अधिक पेशाब के लिए उठना।
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पॉलीफेगिया (अत्यधिक भूख लगना): कोशिकाओं तक ग्लूकोज ऊर्जा के रूप में न पहुंचने के कारण बार-बार तेज भूख लगना।
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अचानक वजन कम होना: बिना किसी डाइटिंग या वर्कआउट के शरीर का वजन तेजी से घटना।
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आंखों के आगे धुंधलापन: हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस से नमी खींच लेता है, जिससे देखने में धुंधलापन महसूस होता है।
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लगातार थकान और घाव देर से भरना: शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना और त्वचा पर लगा कोई भी कट या घाव सामान्य से अधिक समय में ठीक होना।
डॉक्टरों की सलाह: प्यास सताए तो क्या करें और किन बातों से बचें?
चिकित्सकों का कहना है कि यदि आपको पिछले कुछ दिनों से असामान्य प्यास लग रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जीवनशैली में ये जरूरी बदलाव लाएं:
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तत्काल ब्लड टेस्ट कराएं: बिना देर किए फास्टिंग ब्लड शुगर (Fasting), पीपी (Post Prandial) और पिछले 3 महीने का औसत बताने वाला HbA1c टेस्ट जरूर करवाएं।
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मीठे पेय पदार्थों से पूरी तरह परहेज: प्यास बुझाने के लिए कभी भी पैक्ड फ्रूट जूस, कोल्ड ड्रिंक्स या सोडा का सेवन न करें। इनमें मौजूद फ्रुक्टोज और रिफाइंड शुगर ब्लड ग्लूकोज को और तेजी से स्पाइक कर स्थिति को गंभीर बना देते हैं।
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सादा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स: केवल सादा गुनगुना या मटके का पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह पर ही नारियल पानी या नींबू पानी का सीमित सेवन करें।
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दवाइयों और इंसुलिन का नियमित डोज: यदि आप पहले से डायबिटीज के मरीज हैं और अचानक यह समस्या बढ़ी है, तो यह अनियंत्रित शुगर का संकेत है। तुरंत अपने चिकित्सक से दवाइयों की डोज री-कैलिब्रेट करवाएं।