थकान, बालों का झड़ना और मुंहासे: शरीर में होने वाले इन बदलावों को न लें हल्के में; गंभीर समस्या 'PMOS' हो सकती है वजह

थकान, बालों का झड़ना और मुंहासे: शरीर में होने वाले इन बदलावों को न लें हल्के में; गंभीर समस्या 'PMOS' हो सकती है वजह

दैनिक जीवन की भागदौड़ और आधुनिक दिनचर्या के बीच अक्सर महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। सुबह उठते ही अत्यधिक थकान महसूस होना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन तेजी से बढ़ना, चेहरे पर जिद्दी मुंहासे और एक्ने निकलना, त्वचा का बेजान होना तथा सिर के बालों का लगातार पतला होकर झड़ना—ऐसी समस्याएं आज के समय में हर दूसरी महिला की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं। यदि खानपान और जीवनशैली ठीक होने के बावजूद आपके शरीर में ऐसे परिवर्तन लगातार आ रहे हैं, तो सावधान हो जाने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी लक्षणों के पीछे एक बहुत बड़ा और छिपा हुआ हार्मोनल कारण हो सकता है जिसे अब चिकित्सा जगत में 'पीएमओएस' (PMOS) के नाम से जाना जा रहा है। पहले इसे केवल पीसीओडी (PCOD) या ओवरी में सिस्ट की समस्या समझा जाता था, लेकिन अब इसका दायरा काफी व्यापक हो चुका है।

 क्या है पीएमओएस (PMOS)? महिलाओं के हॉर्मोन्स और मेटाबॉलिज्म को कैसे करता है प्रभावित

पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyeocrine Metabolic Ovarian Syndrome - PMOS) महिलाओं में होने वाला एक बेहद जटिल हार्मोनल और चयापचय (मेटाबॉलिक) विकार है। इस स्थिति में शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) की समस्या पैदा होती है और ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में पीएमओएस से पीड़ित लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ होती हैं कि उनके शरीर में क्या चल रहा है और वे इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, गंभीर हृदय रोग और प्रजनन संबंधी भारी जोखिमों को जन्म दे सकती है। यह सिंड्रोम केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के पूरे हार्मोनल तंत्र और मेटाबॉलिज्म को अपनी चपेट में लेता है।

 मुख्य कारण और प्रमुख लक्षण: पहचानें शरीर के ये छुपे हुए संकेत

पीएमओएस मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। जब शरीर में एंड्रोजन की मात्रा बढ़ती है, तो चेहरे, छाड़ी और ठोड़ी पर अनचाहे बाल उगने लगते हैं, बाल झड़ने लगते हैं और त्वचा पर भयानक एक्ने उभर आते हैं। इसके अलावा इंसुलिन प्रतिरोध के कारण शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाती हैं, जिससे ब्लड शुगर और वजन दोनों अनियंत्रित होने लगते हैं। यदि आपके परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही है, तो आनुवंशिक कारणों से इसका जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है:

  • मासिक धर्म (Periods) का अनियमित होना, चक्र में भारी देरी होना या बहुत कम या अत्यधिक रक्तस्राव होना।

  • पेट के आसपास और कमर की तरफ चर्बी का तेजी से जमा होना।

  • जबड़े और गालों के आसपास बार-बार जिद्दी मुंहासे निकलना।

  • सिर के बालों का तेजी से झड़ना और बालों का घनत्व कम होना।

  • हर समय भारीपन, थकान और सुस्ती महसूस होना।

  • मनोदशा में अचानक बदलाव (Mood Swings), अत्यधिक तनाव और आत्मविश्वास में कमी आना।

गंभीर बीमारियां और गर्भपात (Miscarriage) का बढ़ता खतरा

चिकित्सकीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, यदि पीएमओएस के लक्षणों को समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो महिलाओं में कई गंभीर बीमारियां घर कर सकती हैं। इनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हाई कोलेस्ट्रॉल, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, स्लीप एपनिया और यहां तक कि गर्भाशय की आंतरिक परत से जुड़े गंभीर जोखिम शामिल हैं। इसके अलावा जर्नल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म में प्रकाशित शोध के अनुसार, हार्मोन असंतुलन अधिक बढ़ जाने पर दिल की बीमारियों और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा 68 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, और यदि इसका निदान न हो तो गर्भपात (Miscarriage) की आशंका भी बनी रहती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर और जीवनशैली में जरूरी बदलाव

शारीरिक बदलावों, इनफर्टिलिटी, वजन बढ़ने और चेहरे के सौंदर्य पर पड़ने वाले असर के कारण महिलाओं को गंभीर एंग्जायटी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में तनाव प्रबंधन बहुत जरूरी है। पीएमओएस को नियंत्रित करने के लिए अपनी जीवनशैली में ये बदलाव करें:

  • फाइबर युक्त आहार: अपने भोजन में अधिक मात्रा में फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें, जिससे इंसुलिन का स्तर संतुलित रहे।

  • हरी सब्जियां और मौसमी फल: जंक फूड और अत्यधिक मीठी चीजों से दूरी बनाएं और ताजे फल व हरी पत्तेदार सब्जियों को प्राथमिकता दें।

  • नियमित व्यायाम: वजन और हार्मोन्स को नियंत्रण में रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट कसरत, योग या प्राणायाम के लिए निकालें।

  • पूरी नींद और तनाव मुक्ति: मेडिटेशन करें और यह सुनिश्चित करें कि आपकी दैनिक नींद पूरी हो ताकि शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी दुरुस्त रह सके।