हेल्थ अलर्ट: 46 हजार से ज्यादा मरीज और 133 मौतें; पड़ोसी देश बांग्लादेश में बेकाबू हुआ डेंगू, बुखार उतरने के बाद भी मंडरा रहा मौत का खतरा
मानसून की भारी बारिश और बाढ़ के बाद दक्षिण एशिया में मच्छर जनित बीमारियों ने गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप इस कदर बेकाबू हो चुका है कि वहां के अस्पतालों में बेड्स और दवाओं की भारी किल्लत पैदा हो गई है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और कंट्रोल रूम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में डेंगू संक्रमण का कुल आंकड़ा 46,938 के पार पहुंच चुका है।
सबसे डरावनी बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी के चलते अब तक 133 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है। बीते 24 घंटों के दौरान ही 1,463 नए मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जो इस साल एक दिन में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की सबसे बड़ी संख्या है। राजधानी ढाका, मैमनसिंह और रंगपुर संभाग में हालात सबसे ज्यादा नाजुक बने हुए हैं।
भारत में भी बढ़ा खतरा: अगस्त से अक्टूबर का समय सबसे संवेदनशील
बांग्लादेश में मचे इस हाहाकार ने भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों और डॉक्टरों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भौगोलिक निकटता और एक जैसे मानसूनी मौसम के कारण भारत में भी अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीने डेंगू और मलेरिया के संक्रमण के लिहाज से सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं।
देश में अब तक डेंगू के 10,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर के राज्य प्रमुख रूप से प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में जलभराव के कारण एडीज मच्छरों के लार्वा तेजी से पनप रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय नगर निगमों ने फॉगिंग, लार्वानाशक छिड़काव और जन-जागरूकता अभियानों को युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए हैं।
सबसे बड़ा धोखा: बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है जानलेवा जोखिम?
आमतौर पर किसी भी बीमारी में बुखार कम होने का मतलब मरीज के ठीक होने की शुरुआत माना जाता है, लेकिन डेंगू के मामले में यह धारणा जानलेवा साबित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वरिष्ठ फिजिशियनों के मुताबिक, डेंगू संक्रमण का सबसे खतरनाक चरण यानी 'क्रिटिकल फेज' (Critical Phase) बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच उस वक्त शुरू होता है जब तेज बुखार अचानक सामान्य होने लगता है।
इस क्रिटिकल फेज में कैपिलरी लीकेज (रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ का बाहर निकलना) शुरू हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर खतरनाक रूप से नीचे गिर सकता है और मरीज डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) या डेंगू हेमोरेजिक फीवर (DHF) की चपेट में आ जाता है। यदि इस दौरान मरीज को नीचे दिए गए गंभीर चेतावनी संकेत (Warning Signs) दिखाई दें, तो बिना एक पल गंवाए उसे तुरंत आईसीयू या आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी चाहिए:
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पेट में लगातार और असहनीय तेज दर्द होना।
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बार-बार लगातार उल्टियां होना या उल्टी में खून के अंश दिखना।
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मसूड़ों, नाक या पेशाब के रास्ते से असामान्य रक्तस्राव होना।
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सांस लेने में भारी तकलीफ या सांसों की गति असामान्य रूप से तेज होना।
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ब्लड प्रेशर का गिरना और अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या अत्यधिक बेचैनी महसूस होना।
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प्लेटलेट काउंट (Platelet Count) का 50,000 से नीचे अचानक तेजी से गिरना।
भूलकर भी न करें ये गलतियां: एस्पिरिन और ब्रूफेन बन सकती हैं काल
डेंगू के इलाज को लेकर डॉक्टरों ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि इस बीमारी के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा मौजूद नहीं है, इसलिए इसका उपचार लक्षणों और सपोर्टिव केयर (द्रव प्रबंधन) पर आधारित होता है। घर पर खुद से इलाज करने यानी सेल्फ-मेडिकेशन की आदत मरीज के लिए घातक बन सकती है:
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पेनकिलर लेने से बचें: शरीर दर्द और बुखार होने पर कभी भी एस्पिरिन (Aspirin), आइबुप्रोफेन (Ibuprofen) या डिक्लोफेनाक जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) न लें। ये दवाएं खून को पतला करती हैं और शरीर के अंदरूनी अंगों में ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
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सिर्फ पैरासिटामोल का इस्तेमाल: बुखार और बदन दर्द के नियंत्रण के लिए डॉक्टर की सलाह से केवल पैरासिटामोल की नियंत्रित खुराक ही ली जानी चाहिए।
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हाइड्रेशन है सबसे बड़ा हथियार: मरीज को डिहाइड्रेशन और शॉक से बचाने के लिए दिनभर में प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ (ORS घोल, नारियल पानी, नींबू पानी, दाल का पानी और सूप) का सेवन कराएं।
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मच्छरदानी का इस्तेमाल: यदि घर में किसी को डेंगू हुआ है, तो उसे हमेशा मच्छरदानी के भीतर रखें। यदि कोई एडीज मच्छर संक्रमित मरीज को काटता है, तो वह घर के अन्य स्वस्थ सदस्यों में भी वायरस फैला सकता है।
एडीज मच्छर से बचाव ही एकमात्र सुरक्षा: घर और दफ्तर में रखें ये सावधानियां
डेंगू फैलाने वाला एडीज इजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अंडे देता है और यह मुख्य रूप से दिन के समय (सुबह और शाम ढलने से पहले) ही काटता है। संक्रमण से बचने के लिए इन बुनियादी सावधानियों का पालन अनिवार्य है:
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घर के कूलरों, पक्षियों के बर्तनों, गमलों की ट्रे और छतों पर रखे पुराने टायरों या कबाड़ में एक सप्ताह से अधिक समय तक पानी जमा न रहने दें।
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बाहर निकलते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और खुले अंगों पर मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का उपयोग करें।
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खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाकर रखें ताकि मच्छरों का घर के भीतर प्रवेश रोका जा सके।
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पानी की टंकियों और कंटेनरों को हमेशा ढक्कन लगाकर एयर-टाइट रखें।