HBD Preity Zinta : दिल से शुरू हुआ सफर और वीर जारा से बनीं दिलों की मल्लिका ,प्रीति जिंटा के 51वें जन्मदिन पर उनकी 5 सबसे आइकोनिक फिल्में
News India Live, Digital Desk : 31 जनवरी 1975 को जन्मी प्रीति जिंटा ने 1998 में मणिरत्नम की फिल्म 'दिल से' में मात्र 20 मिनट के रोल से दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया था। आज उनके जन्मदिन के मौके पर, सोशल मीडिया पर 'वीर', 'नयना' और 'जारा' जैसे उनके किरदारों की यादें ताजा हो गई हैं।
1. दिल से (1998) - वो यादगार शुरुआत
भले ही मुख्य भूमिका मनीषा कोइराला की थी, लेकिन प्रीति जिंटा ने अपनी ऊर्जा और 'जिया जले' गाने से गहरी छाप छोड़ी। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर का 'बेस्ट डेब्यू' अवॉर्ड मिला।
2. क्या कहना (2000) - लीक से हटकर चुनाव
करियर के शुरुआती दौर में ही प्रीति ने एक 'कुंवारी मां' का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया था। इस फिल्म ने साबित कर दिया कि वह केवल 'ग्लैमरस डॉल' नहीं, बल्कि एक सशक्त अभिनेत्री हैं।
3. प्रीति की टॉप 'कल्ट क्लासिक्स' (The Masterpieces)
| फिल्म | साल | किरदार | खासियत |
|---|---|---|---|
| दिल चाहता है | 2001 | शालिनी | आधुनिक और स्वतंत्र विचारों वाली महिला की पहचान। |
| कल हो ना हो | 2003 | नयना | चश्मा पहनने वाली गंभीर नयना का चुलबुली बनना दर्शकों को भावुक कर गया। |
| वीर-जारा | 2004 | जारा हयात खान | एक पाकिस्तानी लड़की का किरदार, जिसे आज भी सीमा पार के प्यार की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है। |
4. ऋतिक और सैफ के साथ सुपरहिट केमिस्ट्री
कोई... मिल गया (2003): ऋतिक रोशन के साथ उनकी जोड़ी और 'निशा' का किरदार बच्चों से लेकर बड़ों तक सबका पसंदीदा बना।
सलाम नमस्ते (2005): सैफ अली खान के साथ 'लिव-इन रिलेशनशिप' जैसे बोल्ड विषय पर बनी इस फिल्म ने प्रीति को एक आधुनिक भारतीय नारी के रूप में स्थापित किया।
5. फिल्मों से दूर, लेकिन 'किंग्स' की मालकिन
पिछले कुछ वर्षों से प्रीति फिल्मों में कम सक्रिय हैं, लेकिन IPL टीम 'पंजाब किंग्स' (PBKS) की मालकिन के रूप में वे अक्सर मैदान पर अपनी टीम का उत्साह बढ़ाते हुए नजर आती हैं। उन्होंने 2016 में जीन गुडइनफ से शादी की और अब लॉस एंजिल्स में अपने जुड़वां बच्चों (जय और जिया) के साथ समय बिता रही हैं।
34 बेटियों की मां
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रीति ने ऋषिकेश के एक अनाथालय से 34 लड़कियों को गोद लिया है। वे न केवल उनकी शिक्षा बल्कि उनके पालन-पोषण का पूरा खर्च भी उठाती हैं। उनकी यह मानवीय छवि उन्हें पर्दे के बाहर भी एक 'सुपरस्टार' बनाती है।