Harsiddhi Mata Ujjain : सम्राट विक्रमादित्य की कुलदेवी हरसिद्धि माता जानें मंदिर का इतिहास और यहाँ के चमत्कारी दीपदान का महत्व
News India Live, Digital Desk : महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) में स्थित मां हरसिद्धि का मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती के ऊपर का 'दायां हाथ' (कौहनी) गिरा था। यह मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपनी आध्यात्मिक शक्ति के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है।
1. सम्राट विक्रमादित्य की कुलदेवी
कुलदेवी: न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य मां हरसिद्धि के अनन्य भक्त थे और उन्हें अपनी कुलदेवी मानते थे।
बलिदान की कथा: कहा जाता है कि विक्रमादित्य ने माता को प्रसन्न करने के लिए 11 बार अपने सिर की बलि दी थी, लेकिन माता की कृपा से हर बार उनका सिर वापस जुड़ जाता था। मंदिर के एक स्तंभ पर आज भी 11 कटे हुए सिरों की आकृतियां देखी जा सकती हैं।
2. दीप स्तंभ और दीपदान का महत्व (Deepdaan Tradition)
मंदिर के प्रांगण में दो विशाल दीप स्तंभ (Deep Stambha) स्थित हैं, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान हैं:
1100 दीपकों का प्रज्वलन: इन दो स्तंभों पर कुल 1100 दीपक लगे हैं। शाम की आरती के समय जब इन्हें एक साथ जलाया जाता है, तो पूरा मंदिर परिसर अद्भुत स्वर्ण आभा से जगमगा उठता है।
मन्नत पूरी होना: ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इन दीप स्तंभों को प्रज्वलित करवाता है (दीपदान करता है), उसकी हर मनोकामना माता हरसिद्धि पूरी करती हैं।
कठिन परंपरा: इन स्तंभों पर चढ़कर दीपक जलाना काफी कठिन कार्य है, जिसे मंदिर के विशेष सेवक ही अंजाम देते हैं।
3. मंदिर की बनावट और गर्भगृह
तीन देवियों का वास: मंदिर के गर्भगृह में माँ हरसिद्धि के साथ-साथ ऊपर की ओर माँ अन्नपूर्णा और नीचे माँ सरस्वती विराजमान हैं।
श्री यंत्र: यहाँ माता की प्रतिमा के पीछे एक प्राचीन 'श्री यंत्र' भी स्थापित है, जिसकी पूजा का विशेष विधान है।
4. आगामी चैत्र नवरात्रि 2026 की तैयारी
नवरात्रि के दौरान (जो मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू हो रही है) यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है:
विशेष आरती: नवरात्रि के नौ दिनों तक यहाँ सुबह और शाम विशेष श्रृंगार और महाआरती का आयोजन होता है।
बुकिंग: दीपदान के लिए भक्तों की इतनी श्रद्धा है कि स्तंभों को प्रज्वलित करने की बुकिंग महीनों पहले ही हो जाती है।