चकूला स्कूल कांड में बड़ा मोड़: 8 साल के आरोपी बच्चे को मिली सशर्त जमानत
हरियाणा के पंचकूला स्थित सरकारी स्कूल में 6 साल की केजी कक्षा की छात्रा पर हुए जानलेवा हमले और सनसनीखेज वारदात के मामले में कानूनी प्रक्रिया और राहत की दो सबसे बड़ी खबरें एक साथ सामने आई हैं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB), पंचकूला ने इस मामले में आरोपी 8 वर्षीय तीसरी कक्षा के छात्र को सशर्त जमानत मंजूर करते हुए उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल मंचों पर तैर रहे घटना के वीडियो और पीड़ित व आरोपी मासूमों की पहचान उजागर करने वाली तस्वीरों को तुरंत प्रभाव से हटाने के सख्त आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, चंडीगढ़ पीजीआईएमईआर (PGIMER) में कई दिनों तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद नन्हीं बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। जब बच्ची अपने घर पहुंची तो परिजनों, पड़ोसियों और स्थानीय नागरिकों ने फूलों की बारिश और गुब्बारों से सजावट कर उसका भव्य और भावुक 'ग्रैंड वेलकम' किया।
#1 जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से आरोपी छात्र को मिली सशर्त जमानत और इलाज के कड़े निर्देश
पंचकूला के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष सुनवाई के दौरान आरोपी 8 साल के छात्र की मेंटल मैपिंग टेस्ट (Mental Mapping Test) रिपोर्ट पेश की गई। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे का व्यवहार सामान्य नहीं (Abnormal) पाया गया है और उसे तुरंत विशेष मनोवैज्ञानिक परामर्श व दिमागी इलाज की सख्त जरूरत है। 31 अक्टूबर से अंबाला के आब्जर्वेशन होम में रह रहे इस बच्चे की उम्र, मानसिक स्थिति और पढ़ाई के नुकसान को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने उसे सशर्त बेल प्रदान की। जमानत की शर्तों के मुताबिक, माता-पिता को यह शपथ-पत्र देना पड़ा है कि बच्चे को किसी भी हालत में मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा, उसे कभी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और जीएमसीएच-32 (GMCH-32) से उसका नियमित मनोवैज्ञानिक इलाज कराया जाएगा। इसके साथ ही, बोर्ड ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बच्चे का किसी दूसरे स्कूल में दाखिला कराकर उसकी शिक्षा जारी रखी जाए। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 27 नवंबर तय की गई है।
#1 डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हिंसक वीडियो और पहचान से जुड़ी सामग्री हटाने का पुलिस को आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 की धारा 74 का हवाला देते हुए एक अलग याचिका दायर की थी। इसमें कोर्ट से गुहार लगाई गई थी कि घटना के समय सीसीटीवी फुटेज और कक्षा के भीतर हुई मारपीट के भयानक वीडियो सोशल मीडिया पर खुलेआम वायरल हो रहे हैं, जिससे बाल अधिकारों का हनन हो रहा है और कानून के उल्लंघन में शामिल बच्चे की पहचान उजागर हो रही है। बोर्ड ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए जांच अधिकारी (IO) और हरियाणा पुलिस को कड़ा निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर यूट्यूब, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से ऐसी तमाम आपत्तिजनक और पहचान उजागर करने वाली सामग्रियों को तत्काल हटवाया जाए और अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जाए।
#1 पीजीआई से डिस्चार्ज हुई 6 साल की मासूम, ढोल-नगाड़ों और फूलों से घर में हुआ ग्रैंड वेलकम
अस्पताल में चले गहन इलाज और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी के बाद बुधवार को जब 6 वर्षीय पीड़ित बच्ची को पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से डिस्चार्ज किया गया, तो वहां बेहद भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले। अस्पताल प्रशासन और पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बच्ची का सारा इलाज और प्राइवेट वार्ड का खर्च बिना किसी आर्थिक बोझ के निःशुल्क वहन किया। बच्ची जब गुब्बारों से सजी एंबुलेंस से अपने पीरमुच्छला स्थित घर पहुंची, तो पूरा मोहल्ला उसकी अगवानी के लिए सड़कों पर उतर आया। लोगों ने फूल बरसाकर, मालाएं पहनाकर और तालियां बजाकर उसका स्वागत किया। मासूम बच्ची के सिर पर टांके और चेहरे पर चोटों के निशान जरूर थे, लेकिन घर लौटने की खुशी में उसकी हंसी देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। परिजनों ने इसे अपनी बच्ची का "दूसरा जन्म" करार दिया और पूरे देश का दुआओं के लिए शुक्रिया अदा किया।
#1 स्कूल सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल और भविष्य की राह
इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम ने देश भर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और अध्यापकों की सतर्कता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया था। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने लापरवाही बरतने के आरोप में स्कूल की प्रिंसिपल और दो जेबीटी शिक्षिकाओं को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया था। बच्ची की मां ने नम आंखों से अपील करते हुए कहा कि स्कूलों और शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी चाहिए ताकि किसी अन्य मासूम और उसके परिवार को इस तरह के दर्दनाक दौर से न गुजरना पड़े। वहीं बच्ची के पिता ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपनी बहादुर बेटी को आगे पढ़ा-लिखाकर एक बड़ा अफसर बनाएंगे, जबकि बच्ची ने खुद डॉक्टर बनकर दूसरों का इलाज करने का अपना सपना जाहिर किया है।