Harassment Case Karauli : क्या स्कूलों में बढ़ रहे हैं मानसिक तनाव? शिक्षकों पर लगे मानसिक उत्पीड़न के आरोप
News India Live, Digital Desk : शिक्षा एक ऐसा मंदिर होना चाहिए, जहाँ बच्चे सुरक्षित महसूस करें और निडर होकर पढ़ें। लेकिन जब इसी मंदिर से कोई ऐसी दुखद खबर आती है, तो यह हम सभी के लिए सोचने वाली बात है। राजस्थान के करौली (Karauli, Rajasthan) में एक निजी स्कूल के छात्र (Private School Student) की आत्महत्या (Suicide) का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
यह घटना सिर्फ़ एक ख़बर नहीं, बल्कि आज के शिक्षा व्यवस्था (Modern Education System) और बच्चों पर बढ़ रहे मानसिक दबाव (Mental Stress on Students) का एक दर्दनाक सच है।
आत्महत्या के पीछे क्या वजह बताई जा रही है?
छात्र के परिवार और आस-पड़ोस के लोगों ने स्कूल के टीचरों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका साफ़ कहना है कि स्कूल के शिक्षक और कुछ कर्मचारी छात्र को लगातार परेशान (Teachers Harassment to Student) कर रहे थे, जिसके कारण वह इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हो गया। ये मानसिक उत्पीड़न (Mental Torture) क्यों और किस विषय पर था, पुलिस अब इसकी जांच कर रही है।
खबर है कि मृत छात्र कक्षा 10वीं का छात्र था और उस पर शायद पढ़ाई को लेकर या स्कूल के नियमों को लेकर बहुत ज़्यादा दबाव (Excessive Pressure on Student) डाला जा रहा था। आजकल हर कोई सिर्फ अच्छे नंबर की दौड़ में शामिल है, और कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन का प्रेशर (School Administration Pressure) और माता-पिता की उम्मीदें (Parents Expectations) बच्चों को मानसिक तौर पर तोड़ देती हैं।
क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
यह मामला सामने आने के बाद, करौली पुलिस (Karauli Police) ने तुरंत स्कूल प्रशासन और आरोपित शिक्षकों के ख़िलाफ़ (Case Against Teachers and School Administration) केस दर्ज कर लिया है। अब मामले की हर एंगल से जाँच की जा रही है कि छात्र पर किस तरह का दबाव (Type of Pressure on Student) था और इसमें कौन-कौन शामिल हैं।
एक समाज के तौर पर, यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य (Students Mental Health) को गंभीरता से लें। हर स्कूल को बच्चों के तनाव (Stress in Students) को समझने के लिए काउंसलर रखने चाहिए। केवल बेहतर पढ़ाई ही नहीं, बल्कि एक बच्चे की भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Security) भी उतनी ही ज़रूरी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हमें सबक देती है कि 'शिक्षा' को सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास (Overall Development of Children) का आधार बनाना होगा।