Gulf Crisis : ईरान के हमलों से दहली खाड़ी सऊदी-यूएई समेत 7 देशों ने UN में लगाई गुहार, तत्काल चर्चा और एक्शन की मांग
News India Live, Digital Desk : 19 मार्च 2026 को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और जॉर्डन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) को एक कूटनीतिक पत्र (Diplomatic Note) भेजकर ईरान के खिलाफ 'तत्काल चर्चा' (Urgent Debate) की मांग की है। इन देशों का कहना है कि ईरान के "बिना उकसावे वाले" हमले अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
1. खाड़ी देशों की मुख्य मांगें
खाड़ी देशों द्वारा प्रस्तावित मसौदे (Draft Resolution) में निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
हमलों पर रोक: ईरान नागरिक बुनियादी ढांचे (Airports, Power Plants) और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत रोके।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान द्वारा इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बाधित करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की जाए।
मुआवजा: हमलों से हुए नागरिक, बुनियादी ढांचे और पर्यावरणीय नुकसान के लिए ईरान से 'हर्जाना' (Reparations) मांगा गया है।
2. UN सुरक्षा परिषद का एक्शन (UNSC Resolution 2817)
इससे पहले, 11 मार्च 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया था:
प्रस्ताव 2817: 15 में से 13 देशों ने ईरान के "भयानक हमलों" की निंदा करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।
रूस और चीन का रुख: इन दोनों देशों ने मतदान से दूरी बनाई (Abstain), जिससे प्रस्ताव बिना किसी वीटो के पारित हो गया।
ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने इस प्रस्ताव को "राजनीति से प्रेरित" और "अनुचित" बताते हुए खारिज कर दिया है। उसका दावा है कि वह केवल अपनी आत्मरक्षा (Article 51) में कार्रवाई कर रहा है।
3. हमलों का असर: अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर चोट
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए सीधे संघर्ष के बाद खाड़ी देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है:
ऊर्जा संकट: सऊदी की रिफाइनरियों और ओमान के सलालाह पोर्ट पर हुए हमलों के कारण कच्चे तेल और LNG की कीमतों में भारी उछाल आया है।
विमानन सेवा ठप: दुबई और अबू धाबी हवाई अड्डों पर हमलों के कारण रोजाना 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो रही हैं।
मानवीय क्षति: मानवाधिकार संगठनों (HRW) के अनुसार, इन हमलों में अब तक कई प्रवासी कामगारों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं।
4. सऊदी अरब की कड़ी चेतावनी
19 मार्च को रियाद में हुई एक आपातकालीन बैठक में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि "ईरान पर जो थोड़ा बहुत भरोसा बचा था, वह अब पूरी तरह टूट चुका है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हमले नहीं रुके, तो खाड़ी देश सैन्य जवाबी कार्रवाई (Military Retaliation) का विकल्प सुरक्षित रखते हैं।