Global oil Market : तेल के खेल में भारत का मास्टरस्ट्रोक, कैसे रूस ने बदली पूरी तस्वीर, मध्य-पूर्व फिर भी टिका

Post

News India Live, Digital Desk: Global oil Market :  भारत के तेल आयात बाजार में रूस का दबदबा बढ़ता जा रहा है, और इसने पारंपरिक व्यापारिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है. जहाँ पहले रूस भारत के लिए तेल का एक छोटा सप्लायर था, वहीं अब यह एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है. बावजूद इसके, मध्य-पूर्व के बड़े तेल उत्पादक देशों ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है

एक समय में, 2021 से पहले, रूस भारत के तेल आयात में मुश्किल से 2 प्रतिशत का योगदान देता था. लेकिन, यूक्रेन युद्ध के बाद बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों ने सब कुछ बदल दिया. रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद, उसने रियायती दरों पर कच्चे तेल की पेशकश की, जिसका भारत ने भरपूर फायदा उठाया. 2022 तक, रूस भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था और 2025 आते-आते वह इराक और सऊदी अरब को पछाड़ते हुए सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया, जो प्रतिदिन लगभग 1.7 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति कर रहा है.

इस बड़े बदलाव ने कुछ हद तक भारतीय तेल बाजार का नक्शा जरूर बदल दिया है, लेकिन मध्य-पूर्व के बड़े सप्लायर, जैसे इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अपनी जगह पर कायम हैं. इन देशों से भारत की तेल आपूर्ति में 2021 के मुकाबले केवल मामूली गिरावट आई है, और यूएई की आपूर्ति तो 3 प्रतिशत तक बढ़ भी गई है. भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये लंबे समय से भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता रहे हैं, और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से उनके साथ हुए समझौतों को महत्वपूर्ण माना जाता है.[1][5]

रूस से तेल आयात बढ़ने का सबसे ज़्यादा असर छोटे और दूरस्थ सप्लायर्स पर पड़ा है. अमेरिका, नाइजीरिया, कुवैत, ओमान और मैक्सिको जैसे देशों से भारत की तेल खरीद में भारी गिरावट आई है, कई मामलों में तो यह आधी या उससे भी ज्यादा घट गई है भारत के लिए रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद रहा है, बल्कि इससे अरबों डॉलर की बचत भी हुई है. यह कदम भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का भी हिस्सा है.

अमेरिका जैसे देशों द्वारा रूसी तेल आयात कम करने के दबाव के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी है भारत का तर्क रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए विकल्पों का चयन करने को स्वतंत्र है. दिलचस्प बात यह भी है कि भारतीय रिफाइनरियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy), ने रूसी कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात किया है और उसे रिफाइन करके उन देशों को भी निर्यात किया है जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे इन कंपनियों को काफी मुनाफा हुआ है.

कुल मिलाकर, भारत का तेल व्यापार अब अधिक गतिशील और विविधतापूर्ण हो गया है, जहाँ भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे रही हैं.