India-US Trade : 70 बार उड़ा मज़ाक, फिर भी खामोश हैं मोदी? ट्रंप के बयानों ने आखिर क्यों बढ़ा दी कांग्रेस की बैचेनी?

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News India Live, Digital Desk : लेकिन, इसी दोस्ती को लेकर अब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर तंज कसना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में कई बार प्रधानमंत्री मोदी और भारत की व्यापार नीतियों का मजाक उड़ाया है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर पूरी तरह से मौन साधे हुए है।

मामला क्या है? क्यों भड़की है कांग्रेस?
दरअसल, ये विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका में चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के टैक्स सिस्टम और व्यापारिक टैरिफ को 'अन्यायपूर्ण' बताया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि ट्रंप ने एक या दो बार नहीं, बल्कि अब तक करीब 70 बार प्रधानमंत्री मोदी और भारत की नीतियों पर कटाक्ष किया है या उनका मज़ाक उड़ाया है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जिस प्रधानमंत्री की छवि एक सशक्त और 'शेर की तरह दहाड़ने' वाले नेता की है, वो ट्रंप के बयानों पर इतने रक्षात्मक क्यों हैं? कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के लिए ट्रंप को 'दोस्त' कहकर बुलाया गया था, लेकिन अब वही दोस्त भारत को 'ट्रेड चोर' जैसा बताने पर तुले हैं।

दोस्ती और कूटनीति के बीच का टकराव
बात सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों के पास आते ही वहां का माहौल भारत जैसी बड़ी इकोनॉमी को लेकर थोड़ा तल्ख हुआ है। ट्रंप का कहना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाता है और अगर वो सत्ता में आए तो इसका कड़ा जवाब देंगे।

यहीं से कांग्रेस को मौका मिल गया। विपक्ष का कहना है कि जब ट्रंप प्रधानमंत्री के आत्मसम्मान और देश के व्यापारिक हितों पर प्रहार कर रहे हैं, तो सरकार को ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए। 'मौन रहना' किसी कमजोर देश की निशानी हो सकता है, लेकिन आज के नए भारत की नहीं।

राजनीतिक भूचाल और भविष्य के संकेत
एक्स (ट्विटर) पर छिड़ी इस बहस में लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ का कहना है कि चुनाव प्रचार में ट्रंप अक्सर इस तरह के 'स्टंट' करते हैं और इससे कूटनीतिक रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ता। वहीं, कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की चुप्पी बताती है कि शायद अमेरिका के साथ हमारे रिश्तों में वो मजबूती नहीं बची, जिसका दावा मीडिया में किया जाता है।

आपकी राय क्या है?
क्या चुनाव के समय कहे गए शब्दों को इतना तवज्जो देना सही है? या आपको लगता है कि एक स्वाभिमानी देश को हर छोटे-बड़े अपमान पर सख्त स्टैंड लेना चाहिए