Garuda Purana : दूसरों की बुराई करने वालों के लिए नरक में हैं खौफनाक सजाएं गरुड़ पुराण में बताया गया है निंदा करने का भयानक अंजाम

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News India Live, Digital Desk: गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को जीवन और मृत्यु के रहस्यों के बारे में बताया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि केवल शारीरिक हिंसा ही पाप नहीं है, बल्कि वाणी द्वारा किसी को कष्ट देना या किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई करना भी 'वाणी का पाप' (Vocal Sin) माना जाता है। जो लोग दूसरों के चरित्र पर कीचड़ उछालते हैं या दूसरों को नीचा दिखाने के लिए निंदा करते हैं, उनके लिए नरक के द्वार सदैव खुले रहते हैं।

1. निंदा करने वालों के लिए कौन सा नरक?

गरुड़ पुराण के अनुसार, दूसरों की बुराई करने वाले और झूठे आरोप लगाने वाले व्यक्तियों को 'महारौरव' या 'तामिस्र' नरक में भेजा जाता है।

सजा का स्वरूप: यहाँ यमदूत ऐसे पापियों की जीभ को गर्म लोहे की संडासी से खींचते हैं। माना जाता है कि जिस अंग से पाप किया गया है, दंड भी उसी अंग को भोगना पड़ता है।

भयानक कष्ट: दूसरों की निंदा कर आनंद लेने वालों को नरक में तब तक तपाया जाता है जब तक कि उनके पापों का क्षय न हो जाए।

2. अगले जन्म में क्या बनते हैं 'निंदक'?

गरुड़ पुराण केवल नरक की सजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अगले जन्म के बारे में भी चेतावनी देता है:

पशु योनि: जो लोग दूसरों के दोषों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, वे अगले जन्म में गिद्ध या कौआ बनते हैं, जो गंदगी और मृत जीवों को खाते हैं।

शारीरिक कष्ट: निंदा करने की प्रवृत्ति वाले लोग अगले जन्म में वाणी दोष या हकलाने जैसी समस्याओं के साथ जन्म ले सकते हैं।

3. 'परनिंदा' को क्यों माना गया है सबसे बड़ा पाप?

शास्त्रों में कहा गया है कि 'परनिंदा' (दूसरों की बुराई) करना इसलिए खतरनाक है क्योंकि:

अपना पुण्य खोना: जब आप किसी की निंदा करते हैं, तो उस व्यक्ति के पाप आपके खाते में आ जाते हैं और आपके द्वारा किए गए पुण्यों का लाभ उस व्यक्ति को मिल जाता है जिसकी आप बुराई कर रहे हैं।

नकारात्मक ऊर्जा: बुराई करने से मन और मस्तिष्क में नकारात्मकता बढ़ती है, जिससे व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति रुक जाती है।

4. गरुड़ पुराण के अनुसार पाप से मुक्ति के उपाय

यदि आपने अनजाने में किसी की बुराई की है, तो गरुड़ पुराण में पश्चाताप का मार्ग भी बताया गया है:

क्षमा याचना: सबसे पहले उस व्यक्ति से मन ही मन या प्रत्यक्ष रूप से क्षमा मांगें।

मौन व्रत: अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने के लिए समय-समय पर मौन रहने का अभ्यास करें।

नाम जप: भगवान विष्णु के नाम का जप करने से वाणी शुद्ध होती है और पिछले पापों का प्रभाव कम होता है।