नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती दिल्ली चलो से जय हिंद तक, देखिये उनके वो संदेश जो हर भारतीय को याद होने चाहिए

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News India Live, Digital Desk: हर साल 23 जनवरी का दिन हमारे देश के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं होता। आज के दिन ही उस महान शख्सियत का जन्म हुआ था, जिन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया और हमें सिखाया कि 'आज़ादी' मांगी नहीं, छीनी जाती है। हम बात कर रहे हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की। उनके जन्मदिन को हम अब 'पराक्रम दिवस' (Parakram Diwas) के रूप में मनाते हैं।

आज के इस दौर में, जब हम सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते हैं, तो क्यों न नेताजी के उन जोश भरे नारों और संदेशों को साझा करें, जो आज भी हमारे रोंगटे खड़े कर देते हैं?

क्यों खास हैं नेताजी के विचार?
नेताजी सिर्फ़ एक राजनेता नहीं थे, वे एक योद्धा थे। उनकी आवाज़ में वो खनक थी कि लोग अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हो जाते थे। उनका मानना था कि संघर्ष के बिना मिली सफलता का कोई मोल नहीं होता। उनके शब्द आज के युवाओं के लिए भी उतने ही ज़रूरी हैं, जितने आज़ादी के समय थे।

नेताजी के वो नारे जो इतिहास बन गए:

  1. "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा!" - ये नारा आज भी देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
  2. "जय हिंद!" - यह वो नारा है जिसने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरो दिया।
  3. "दिल्ली चलो" - आज़ाद हिंद फ़ौज का वो ऐलान जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी।

आज के दिन स्टेटस और संदेश क्यों शेयर करें?
आजकल के बिजी लाइफस्टाइल में हम अक्सर अपने ही देश के वीरों के बलिदान को भूलने लगते हैं। 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाने का मकसद यही है कि हम नई पीढ़ी को बता सकें कि ये आज़ादी कितनी मुश्किल से मिली है। व्हाट्सएप या फेसबुक पर नेताजी की तस्वीर और उनके सुविचार शेयर करना सिर्फ़ एक ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह उन बलिदानों को सलाम करने का एक छोटा सा तरीका है।

आइए इस पराक्रम दिवस पर कसम लें:
सिर्फ़ नारे लगाने से काम नहीं चलेगा, हमें नेताजी के उस सपने को पूरा करना होगा जहाँ भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो और यहाँ का हर नागरिक सर उठाकर जिए।

तो देर किस बात की? इस बार 23 जनवरी पर अपने अपनों को जोश और देशप्रेम से भरे संदेश भेजें और नेताजी के सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें। जय हिंद!