रेगिस्तान से समंदर किनारे तक राजस्थान के पुरोहित ने मुंबई की राजनीति में कैसे गाड़ा अपना झंडा?

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News India Live, Digital Desk: अक्सर हम सुनते हैं कि मुंबई सपनों का शहर है, लेकिन वहां अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा है। खासकर तब, जब आप राजनीति (Politics) में अपना हाथ आजमा रहे हों और 'मराठी मानुस' की राजनीति के बीच एक 'राजस्थानी' चेहरा हों।

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शख्स की जिसने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया  राज के. पुरोहित (Raj K. Purohit)

राजस्थान के जालोर/सिरोही जैसे सुदूर इलाके से निकलकर मायानगरी मुंबई में अपनी एक अलग पहचान बनाना कोई छोटी बात नहीं है। राज पुरोहित की कहानी सिर्फ़ राजनीति की नहीं, बल्कि संघर्ष और सेवा की है।

वकालत से सियासत तक
राज के. पुरोहित ने शुरुआत एक वकील के तौर पर की थी। कोर्ट में काला कोट पहनकर वो लोगों को इंसाफ दिलाते थे, लेकिन उनका असली मकसद समाज की सेवा करना था। इसी जज़्बे ने उन्हें राजनीति की तरफ खींचा।

मुंबई में मारवाड़ी-राजस्थानी समाज की आवाज़
जब मुंबई में प्रवासियों, खासकर हिंदी भाषी और राजस्थानी समाज के लोगों को कोई समस्या होती थी, तो उनकी जुबां पर एक ही नाम होता था—राज पुरोहित। वो बीजेपी (BJP) से जुड़े और कोलाबा (Colaba) जैसे प्रतिष्ठित इलाके से विधायक (MLA) बनकर विधानसभा पहुंचे।
इतना ही नहीं, उन्हें महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री (Whip/Minister status related roles) जैसी अहम जिम्मेदारियां भी मिलीं। यह इस बात का सबूत है कि काबिलियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती।

विवाद और बेबाकी
राजनीति है तो उतार-चढ़ाव भी होंगे ही। राज पुरोहित अपने बेबाक बयानों और कभी-कभी स्टिंग ऑपरेशन्स (Sting Operations) जैसे विवादों में भी घिरे। लेकिन वो हमेशा इन मुश्किलों से लड़कर बाहर निकले। उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है जो अपने समाज और अपनी पार्टी के लिए हर मोर्चे पर डटा रहता है।

आज भी, जब मुंबई में राजस्थान की बात होती है, तो राज के. पुरोहित का नाम एक 'पिलर' (स्तंभ) की तरह लिया जाता है। उनकी जीवनी उन लाखों युवाओं के लिए एक उम्मीद है जो छोटे शहरों से निकलकर बड़े शहरों में अपना नाम कमाना चाहते हैं।