राजस्थान में गरीबों का दर्द देख जिला कलेक्टर ने उठाया ऐसा कसम, सीएम से लेकर आम जनता तक सब कर रहे सलाम

Post

News India Live, Digital Desk: वहां के कलेक्टर साहब ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कसम खाई है कि वो तब तक अपनी सैलरी (Tanqwah) नहीं लेंगे, जब तक जिले के हर एक पात्र गरीब को सरकारी योजनाओं से जोड़ नहीं दिया जाता।

आखिर ऐसा क्यों किया?
दरअसल, कलेक्टर साहब गांवों के दौरे पर थे। उन्होंने देखा कि सरकार तो ऊपर से इतनी योजनाएं भेजती है पेंशन, राशन, आवास लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। कई गरीब परिवार जानकारी के अभाव में या बाबूगिरी के चक्कर में इनका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

एक गरीब बुज़ुर्ग की लाचारी देखकर शायद उनका दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत आदेश दिया और खुद पर यह शर्त लगा ली। उनका मानना है कि "अगर मैं एक गरीब को उसका हक नहीं दिला सकता, तो मुझे भी सरकारी पैसे लेने का हक नहीं है।"

असर भी दिखने लगा है!
जैसे ही 'साहब' ने सैलरी छोड़ी, नीचे के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जो फाइलें महीनों से धूल खा रही थीं, वो फटाफट निपटने लगीं। सर्वे शुरू हो गए हैं, कैंप लग रहे हैं।
प्रशासन अब घर-घर जाकर ढूंढ रहा है कि कौन विधवा पेंशन से वंचित है या किसे पालदाहार योजना का लाभ नहीं मिल रहा।

यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक 'मोरल प्रेशर' (नैतिक दबाव) है। सोचिये, अगर हर जिले का अफसर ऐसा जज़्बा दिखाए, तो हमारे देश की तस्वीर बदलने में कितना वक्त लगेगा? सलाम है ऐसी सोच को!