Women's Reservation : अब और देरी क्यों? महिला आरक्षण पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, पीएम मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
News India Live, Digital Desk: केंद्र सरकार द्वारा पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर देश में एक बार फिर सियासत गर्मा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कानून के क्रियान्वयन (Implementation) में हो रही देरी को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के रोडमैप पर चर्चा के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जाए।
कांग्रेस की मांग के पीछे की 3 बड़ी वजहें
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मांग के पीछे ठोस तर्क दिए हैं:
2029 का इंतजार क्यों?: सरकार ने पहले कहा था कि महिला आरक्षण जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू होगा। कांग्रेस का तर्क है कि इसे 2029 के लोकसभा चुनावों तक टालना करोड़ों महिलाओं के साथ अन्याय है।
OBC कोटा का पेंच: कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि महिला आरक्षण के भीतर OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए। पार्टी चाहती है कि सर्वदलीय बैठक में इस पर आम सहमति बने।
जनगणना की स्पष्टता: देश में लंबे समय से जनगणना लंबित है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जनगणना और परिसीमन की समयसीमा स्पष्ट नहीं होगी, तब तक आरक्षण महज एक कागज का टुकड़ा बना रहेगा।
"श्रेय की नहीं, अधिकार की बात हो"
कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने संसद में इस बिल का समर्थन किया था, लेकिन अब सरकार इसके नियमों को स्पष्ट करने में देरी कर रही है। राहुल गांधी भी कई मंचों से कह चुके हैं कि बिना 'जातिगत जनगणना' और 'OBC आरक्षण' के यह बिल अधूरा है। सर्वदलीय बैठक की मांग के जरिए कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाना चाहती है कि वह इस ऐतिहासिक कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए कड़े कदम उठाए।
सरकार का क्या है रुख?
सूत्रों के अनुसार, सरकार अपनी पुरानी योजना पर कायम है कि जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सीटों का निर्धारण होगा। हालांकि, विपक्ष के बढ़ते दबाव और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार इस मुद्दे पर अपनी रणनीति स्पष्ट कर सकती है।