छत्तीसगढ़ से दुबई तक कानून के हाथ सच में लंबे निकले महादेव ऐप मामले में आई ये बड़ी गुड न्यूज

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News India Live, Digital Desk : महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Online Book) यानी सट्टेबाजी के उस ऐप के बारे में तो आपने खूब सुना होगा, जिसने छत्तीसगढ़ से लेकर पूरे देश में कोहराम मचा रखा था। हज़ारों युवाओं की गाढ़ी कमाई डूब गई, और कुछ लोग रातों-रात अरबपति बनकर दुबई में ऐश करने लगे। लेकिन, अब उन अरबपतियों के 'बुरे दिन' शुरू हो गए हैं।

ताजा और बड़ी खबर ये है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस ऐप के एक मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल (Ravi Uppal) के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा एक्शन लिया है। खबर ये नहीं है कि कार्रवाई हुई है, खबर ये है कि यह कार्रवाई भारत में नहीं, बल्कि दुबई (Dubai) में हुई है।

दुबई वाली 'तिजोरी' पर ED की नजर

अक्सर अपराधी सोचते हैं कि भारत में घपला करो और दुबई या लंदन भाग जाओ, वहां कोई हाथ नहीं लगा पाएगा। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर भी शायद यही सोच रहे थे। लेकिन ED ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों, तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं।

ED ने रवि उप्पल की दुबई स्थित करोड़ों रुपये की संपत्तियों (Assets) को फ्रीज (जब्त) कर दिया है। यानी, जिस पैसे के दम पर वो वहां रईसों वाली ज़िंदगी जी रहा था, अब वो उस पैसे को छू भी नहीं पाएगा। बताया जा रहा है कि यह पैसा हवाला के जरिए वहां भेजा गया था और फिर वहां प्रॉपर्टी में निवेश किया गया था।

मास्टरमाइंड की कमर तोड़ने की तैयारी

आपको याद दिला दें कि महादेव ऐप मामला सिर्फ सट्टेबाजी का नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का एक बहुत बड़ा केस है। इसमें हजारों करोड़ रुपये इधर से उधर किए गए। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर को इस पूरे सिंडिकेट का 'मास्टरमाइंड' माना जाता है।

दुबई पुलिस ने इंटरपोल (Interpol) के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद रवि उप्पल को पहले ही हिरासत में ले रखा था, और अब ED द्वारा उसकी संपत्ति फ्रीज करना एक बहुत बड़ा प्रहार है। यह कार्रवाई बताती है कि भारत सरकार अब इन भगोड़ों को वापस लाने और उनकी आर्थिक ताकत खत्म करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।

क्या इसका असर पड़ेगा?

बिल्कुल पड़ेगा! जब अपराधी की 'आर्थिक नाकाबंदी' कर दी जाती है, तो वो कमजोर पड़ जाता है।

  1. पैसा बंद: फ्रीज होने का मतलब है कि अब वो इन संपत्तियों को बेच नहीं सकता और न ही इनसे पैसा निकाल सकता है।
  2. कानूनी फंदा: इससे भारत लाने (Extradition) की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

आम जनता के लिए संदेश

यह खबर उन तमाम परिवारों के लिए थोड़ी राहत वाली है जिनके बच्चे इस ऑनलाइन सट्टेबाजी के चक्कर में बर्बाद हुए। यह बताता है कि चाहे अपराधी सात समुंदर पार क्यों न बैठा हो, कानून का डंडा देर से ही सही, लेकिन चलता जरूर है। महादेव ऐप के प्रमोटरों ने सोचा था कि दुबई उनका सुरक्षित किला है, लेकिन ED ने उस किले में भी सेंध लगा दी है।

अब देखना यह होगा कि रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर को कब भारत लाया जाता है और इस स्कैम के और कितने राज खुलने बाकी हैं।