धर्मांतरण पर पहला हंटर, राजस्थान के नए कानून में फंसा दिल्ली का पादरी, 3 साल की जेल पक्की

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान की 'एजुकेशन सिटी' कोटा (Kota) इस वक्त पढ़ाई-लिखाई नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा में है। मामला धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का है। जिस तरह से वहां एक चर्च में कथित तौर पर हिंदू धर्म का अपमान किया गया और लोगों को ईसाई बनने के लिए उकसाया गया, उसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।

यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक हो गई है क्योंकि राजस्थान सरकार ने अभी हाल ही में धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून (Anti-Conversion Law) लागू किया था, और कोटा पुलिस ने शायद पहली बार इस नए हथियार का इस्तेमाल किया है।

क्या है पूरा मामला?
कोटा के बोरखेड़ा इलाके में स्थित बीरशेबा चर्च (Beersheba Church) में पिछले दिनों एक बड़ा आयोजन रखा गया था। इसके लिए दिल्ली से खास तौर पर पादरी चंडी वर्गीस को बुलाया गया था। उनके साथ कोटा के ही अरुण जॉन भी थे।
कहने को तो यह एक सत्संग या प्रार्थना सभा थी, लेकिन शिकायतकर्ता (क्रांति जैन और बजरंग दल) का दावा है कि वहां मंच से "जहर" उगला जा रहा था।

विवादित बयान: "शैतान का राज है"
पुलिस में दर्ज FIR के मुताबिक, पादरी ने माइक पर कहा, "अभी राजस्थान में शैतान का राज है, हमें ईसा मसीह का राज लाना है।"
सिर्फ इतना ही नहीं, आरोप है कि पादरी ने यह भी कहा कि हिंदू देवी-देवताओं और मूर्तियों में कोई शक्ति नहीं होती, उनसे कुछ नहीं मिलता। असली शांति और मोक्ष केवल ईसाई धर्म अपनाने से मिलेगा।

सभा में मौजूद कई लोगों को कथित तौर पर 'बपतिस्मा' (ईसाई दीक्षा) दिलवाया गया। कुछ युवाओं ने स्टेज पर आकर कबूल किया कि उन्होंने धर्म बदल लिया है। जब इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तो शहर में हंगामा मच गया।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई
शिकायत मिलते ही कोटा पुलिस एक्शन मोड में आ गई। पुलिस ने मामले की नज़ाकत को समझते हुए बेहद सख्त धाराएं लगाई हैं:

  1. राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5: यह नया और बेहद कड़ा कानून है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर जमानत मिलना मुश्किल है और लंबी सजा हो सकती है।
  2. BNS धारा 299: यानी जानबूझकर किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना।

क्या सबूत हैं पुलिस के पास?
हिंदू संगठनों ने पुलिस को पेन ड्राइव और मोबाइल क्लिप्स सौंपे हैं। इंस्पेक्टर देवेश भारद्वाज का कहना है कि इन वीडियो फुटेज में आरोपियों को विवादित बातें कहते और लोगों को बरगलाते हुए देखा जा सकता है। पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है।

आम जनता के लिए सीख
यह घटना बताती है कि 'चमत्कार' और 'मुक्ति' के नाम पर कैसे भोले-भाले लोगों को टारगेट किया जाता है। राजस्थान का नया कानून अब ऐसे मामलों में ढाल का काम करेगा। प्रशासन का संदेश साफ है—पूजा-पाठ की आज़ादी सबको है, लेकिन किसी के धर्म का अपमान या जबरदस्ती बदलाव अब बर्दाश्त नहीं होगा।

कोटा में फिलहाल माहौल गर्म है, और पुलिस चप्पे-चप्पे पर नज़र रखे हुए है।