श्रीलंका के तट पर भीषण टकराव अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया ईरान का युद्धपोत अमेरिका ने की पुष्टि
News India Live, Digital Desk: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की आग अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गई है। अमेरिका, जो इजरायल का प्रमुख सहयोगी है, अब सीधे तौर पर इस सैन्य संघर्ष में शामिल होता दिख रहा है।
1. घटना का विवरण (The Incident)
स्थान: यह सैन्य कार्रवाई श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के पास गहरे समुद्र में हुई।
कार्रवाई: अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने पुष्टि की है कि उसकी एक परमाणु संचालित पनडुब्बी (Nuclear Submarine) ने ईरानी युद्धपोत पर हमला किया, जिससे वह समुद्र में समा गया।
ईरानी युद्धपोत: बताया जा रहा है कि यह युद्धपोत ईरान का एक महत्वपूर्ण जासूसी या लॉजिस्टिक जहाज था, जो इस क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था।
2. अमेरिका का आधिकारिक बयान (US Confirmation)
अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों के अनुसार:
आत्मरक्षा का तर्क: अमेरिका ने दावा किया है कि ईरानी युद्धपोत ने इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन के लिए खतरा पैदा कर दिया था और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
चेतावनी: अमेरिका ने कहा कि वह अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
3. ईरान की प्रतिक्रिया (Iran's Reaction)
ईरान ने इस घटना को "खुली आक्रामकता" और "अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन" करार दिया है:
बदले की धमकी: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि इस "कायराना हमले" का जवाब सही समय और सही जगह पर दिया जाएगा।
इजरायल पर आरोप: ईरान का मानना है कि यह हमला इजरायल के इशारे पर अमेरिका ने किया है।
4. भारत और श्रीलंका पर असर (Regional Impact)
श्रीलंका के तट के पास हुई इस घटना ने पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ा दी है:
भारत की निगरानी: भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने हिंद महासागर में अपनी गश्त तेज कर दी है और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।
श्रीलंका की स्थिति: श्रीलंका ने अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
5. वैश्विक तेल संकट का डर (Global Oil Crisis)
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ा, तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और हिंद महासागर के व्यापारिक मार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।