बिहार में बनेगा बेंगलुरु जैसा इलेक्ट्रॉनिक सिटी 1 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार,उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल का बड़ा दांव
News India Live, Digital Desk: बिहार सरकार राज्य को आईटी (IT) और इलेक्ट्रॉनिक हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को उनके गृह राज्य में ही बड़े अवसर प्रदान करना है ताकि उन्हें बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों की ओर रुख न करना पड़े।
प्रोजेक्ट की 5 बड़ी बातें
बेंगलुरु मॉडल का अध्ययन: बिहार सरकार की एक उच्च स्तरीय टीम (जिसमें उद्योग सचिव कुंदन कुमार और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं) ने बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी का दौरा किया है। यह टीम वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्किंग मॉडल और टैक्स नीतियों का अध्ययन कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
इन उत्पादों का होगा निर्माण: इस सिटी में ट्रांजिस्टर, डायोड, माइक्रोप्रोसेसर और इंटीग्रेटेड सर्किट जैसे सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स के साथ-साथ मोबाइल फोन, टीवी और डिजिटल कैमरों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने पर फोकस होगा।
रोजगार के अवसर: डॉ. दिलीप जायसवाल ने दावा किया है कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से 1 लाख से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा। इससे 'रिवर्स माइग्रेशन' (Reverse Migration) को बढ़ावा मिलेगा, यानी बिहार के टेक प्रोफेशनल्स वापस अपने राज्य लौट सकेंगे।
स्थान का चयन: हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन चर्चा है कि इसे पटना के पास बिहटा या आसपास के इंडस्ट्रियल बेल्ट में विकसित किया जा सकता है, जहाँ कनेक्टिविटी और जमीन की उपलब्धता बेहतर है।
निवेशक फ्रेंडली नीतियां: बिहार सरकार इस इलेक्ट्रॉनिक सिटी में आने वाली बड़ी वैश्विक कंपनियों को लुभाने के लिए विशेष सब्सिडी और सिंगल विंडो क्लियरेंस (Single Window Clearance) की सुविधा प्रदान करेगी।
फिनटेक सिटी और एजुकेशन सिटी भी कतार में
उद्योग मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक सीमित नहीं है। राज्य में फिनटेक सिटी (Fintech City), लॉजिस्टिक पार्क और एजुकेशन सिटी स्थापित करने की योजना पर भी समानांतर रूप से काम चल रहा है।