Ekadashi Vrat 2026 : मार्च में कब है एकादशी? भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना खंडित हो सकता है आपका उपवास
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, जिसे सभी व्रतों में उत्तम माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह दिन आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का प्रतीक है। मार्च 2026 में आने वाली एकादशी को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है, लेकिन ज्योतिषियों और शास्त्र के जानकारों ने कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है। मान्यता है कि यदि एकादशी के दिन नियमों का पालन न किया जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। विशेष रूप से बाल कटवाने और धोने को लेकर शास्त्रों में कड़े निर्देश दिए गए हैं, जिनका उल्लंघन आपके पुण्य को कम कर सकता है।
मार्च 2026 में एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, मार्च महीने में दो एकादशी व्रत पड़ेंगे। पहली एकादशी शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में आएगी। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ और समापन का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि पारण (व्रत खोलने) का सही समय ही व्रत की पूर्णता निर्धारित करता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे उदय तिथि के अनुसार ही उपवास रखें। श्री हरि की कृपा पाने के लिए इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना फलदायी माना जाता है।
बाल कटवाना और धोना क्यों है वर्जित? जानिए पौराणिक कारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन शरीर की शुद्धि के साथ-साथ विचारों की शुद्धि भी अनिवार्य है। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या सिर धोना वर्जित है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर की बरकत कम होती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और व्रत रखने वाले पुरुषों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है। यदि आप अज्ञानतावश ऐसा करते हैं, तो आपके व्रत के संकल्प में बाधा आ सकती है।
एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें?
एकादशी का व्रत रखने वाले जातकों को दशमी तिथि की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। व्रत के दिन अन्न, विशेष रूप से चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है; गरीबों को सामर्थ्य अनुसार भोजन या वस्त्र दान करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। साथ ही, इस दिन क्रोध करने, झूठ बोलने या किसी की निंदा करने से बचना चाहिए। रात्रि जागरण और कीर्तन करना एकादशी व्रत के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।