एकादशी कोई साधारण व्रत नहीं, यह उस देवी की कहानी है जो भगवान विष्णु के शरीर से जन्मी थी

Post

News India Live, Digital Desk: हम सब एकादशी का व्रत रखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह व्रत शुरू कैसे हुआ? इस व्रत को करने वाली देवी कौन हैं और उनका जन्म कैसे हुआ? इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है, जो हमें सिखाती है कि भगवान भी अपने भक्तों की रक्षा के लिए कैसे लीलाएं करते हैं।

यह कहानी जुड़ी है उत्पन्ना एकादशी से, यानी जिस दिन 'एकादशी देवी' का जन्म हुआ था। साल 2025 में यह सबसे पहली और महत्वपूर्ण एकादशी 26 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

क्या है इसके पीछे की कहानी?

बहुत समय पहले की बात है, सतयुग में एक बहुत ही क्रूर राक्षस था जिसका नाम था 'मुर'। वह इतना ताकतवर था कि उसने स्वर्ग पर हमला करके सभी देवताओं को हरा दिया और इंद्र देव को भी अपनी राजगद्दी छोड़कर भागना पड़ा। सब देवता हारकर भगवान शिव के पास गए, लेकिन शिव जी ने उन्हें भगवान विष्णु के पास भेज दिया।

देवताओं की पुकार सुनकर भगवान विष्णु, मुर राक्षस से युद्ध करने गए। यह युद्ध हज़ारों सालों तक चलता रहा। युद्ध करते-करते भगवान विष्णु बहुत थक गए और उन्होंने कुछ देर आराम करने का फैसला किया। वे बद्रीनाथ के पास एक गुफा में जाकर सो गए।

भगवान विष्णु को अकेला सोता देख, मुर राक्षस उनके पीछे-पीछे गुफा में पहुँच गया। जैसे ही उसने सो रहे विष्णु भगवान पर हमला करने के लिए अपना हथियार उठाया, अचानक भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य और सुंदर देवी का जन्म हुआ। उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र थे और वे बहुत तेजस्वी थीं।

देवी ने मुर राक्षस को ललकारा और पलक झपकते ही अपने तेज से उसे जलाकर राख कर दिया।

जब भगवान विष्णु अपनी नींद से जागे, तो उन्होंने उस राक्षस को मरा हुआ पाया और सामने एक देवी को खड़ा देखा। उन्होंने देवी से पूछा, "आप कौन हैं?"

देवी ने बताया, "हे प्रभु! मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुई हूँ और मैंने ही इस राक्षस का वध किया है।"

उनकी इस वीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया, "आज से तुम्हारा नाम 'एकादशी' होगा, क्योंकि तुम मेरे ग्यारहवें अंश (एकादशी) से उत्पन्न हुई हो। आज के दिन जो भी तुम्हारा और मेरा व्रत रखेगा, उसके सारे पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।"

बस, उसी दिन से उत्पन्ना एकादशी व्रत की शुरुआत हुई। यह कहानी हमें बताती है कि एकादशी सिर्फ़ एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की ही एक शक्ति हैं जो भक्तों की रक्षा करती हैं।

व्रत खोलने का समय (पारण)

व्रत रखने वाले 27 नवंबर 2025 को सुबह 06:53 से 09:02 के बीच अपना व्रत खोल सकते हैं।