NEET UG काउंसलिंग 2026: डॉक्टर बनने की राह देख रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर

NEET UG काउंसलिंग 2026: डॉक्टर बनने की राह देख रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर

देशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए चल रही लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया के बीच एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। हर साल लाखों छात्र नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET की परीक्षा पास करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। माता-पिता अपने बच्चों के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई दांव पर लगा देते हैं। लेकिन इसके बावजूद, जब काउंसलिंग के अंतिम चरण पूरे होते हैं, तो जो परिणाम सामने आते हैं वे हैरान करने वाले होते हैं। इस साल भी नीट यूजी काउंसलिंग के तमाम दौर और मुख्य चरणों के बीत जाने के बाद भी मेडिकल और डेंटल कोर्सेज की सैकड़ों सीटें खाली रह गई हैं। यह स्थिति उन तमाम युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और साथ ही कई गंभीर सवाल खड़े करती है जो कम अंकों या अन्य कारणों से अब तक प्रवेश नहीं पा सके थे।

स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद भी क्यों बच गईं इतनी सारी सीटें?

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी MCC द्वारा आयोजित किए जाने वाले 'स्ट्रे वैकेंसी राउंड' को आमतौर पर एडमिशन प्रक्रिया का अंतिम और निर्णायक पड़ाव माना जाता है। इस साल भी MCC ने एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और बीएससी नर्सिंग की हजारों खाली सीटों को भरने के लिए स्ट्रे वैकेंसी राउंड का आयोजन किया था। इस विशेष राउंड के लिए कुल 4,068 सीटें चिन्हित की गई थीं, जिन्हें योग्य उम्मीदवारों के बीच आवंटित किया जाना था। हालांकि, जब इस राउंड का प्रोविजनल सीट आवंटन परिणाम जारी हुआ, तो यह देखा गया कि तमाम कोशिशों के बावजूद केवल 3,108 सीटें ही छात्रों को अलॉट हो सकीं। इसके बाद भी देश भर के विभिन्न मेडिकल संस्थानों में 800 से अधिक सीटें ऐसी बच गईं, जिन पर किसी ने दाखिला नहीं लिया। इतने चरणों की काउंसलिंग के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रह जाना यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर प्रक्रिया में ऐसी कौन सी व्यावहारिक अड़चनें आ रही हैं, जिनका सामना छात्र और उनके परिवार कर रहे हैं।

क्या है खाली सीटें रहने के पीछे की मुख्य वजहें और छात्रों की मुश्किलें?

जानकारों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल सीटों के खाली रहने के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा और अहम कारण देश के कुछ प्राइवेट और डीम्ड विश्वविद्यालयों का भारी-भरकम फीस ढांचा है। कई बार काउंसलिंग के अंतिम चरणों में वे सीटें बच जाती हैं जिनकी ट्यूशन फीस आम परिवारों के बजट से बहुत बाहर होती है। इसके अलावा, भौगोलिक दूरियां, कॉलेज का लोकेशन और कोर्स को लेकर छात्रों की खास पसंद भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। कई छात्र अपने मनपसंद शहर या कॉलेज में सीट न मिलने पर एडमिशन छोड़ने का जोखिम उठा लेते हैं। हालांकि, जिन छात्रों के पास रैंक अच्छी थी लेकिन वे शुरुआती राउंड में सही चॉइस-फिल्लिंग नहीं कर पाए थे, उनके लिए यह खाली सीटें एक बड़े अवसर की तरह हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान कई बार तकनीकी कारणों या दस्तावेजों के सत्यापन में देरी के कारण भी योग्य उम्मीदवार समय पर सीट सुरक्षित नहीं कर पाते हैं।

क्या मेडिकल दाखिले के लिए छात्रों को मिलेगा एक और नया मौका?

जैसे ही स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद खाली सीटों के आंकड़े सार्वजनिक हुए हैं, वैसे ही देश भर के मेडिकल अभ्यर्थियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में अब यही सवाल सबसे प्रमुख है कि क्या इन बची हुई 800 से ज्यादा सीटों को भरने के लिए कोई नया या विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड आयोजित किया जाएगा? शिक्षा जगत के जानकारों का संकेत है कि खाली सीटों को व्यर्थ जाने से बचाने के लिए संबंधित प्राधिकरण और राज्य स्तर पर काउंसलिंग एजेंसियां अतिरिक्त सत्र या विशेष दौर चला सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक और अंतिम घोषणा नहीं की गई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन उम्मीदवारों को पिछले चरणों में मनचाहा कॉलेज नहीं मिला है या जो थोड़ा और इंतजार करने की स्थिति में हैं, उन्हें लगातार MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर पैनी नजर बनाए रखनी चाहिए।

आगे की प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों को किन बातों का रखना होगा खास ध्यान?

यदि आप भी उन उम्मीदवारों में शामिल हैं जो इस साल मेडिकल प्रवेश की दौड़ में बने हुए हैं, तो आपको बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। काउंसलिंग के इन आखिरी पड़ावों पर जरा सी लापरवाही आपके हाथ से साल भर की मेहनत का अवसर छीन सकती है। जिन छात्रों को पिछले परिणामों में प्रोविजनल रूप से सीटें आवंटित हुई हैं, उन्हें समय सीमा के भीतर अपने सभी जरूरी दस्तावेजों जैसे नीट स्कोरकार्ड, एडमिट कार्ड, बारहवीं की मार्कशीट और श्रेणी प्रमाण पत्र के साथ पूरी तैयारी रखनी चाहिए। इसके साथ ही, यदि नया या स्पेशल राउंड आयोजित होता है, तो चॉइस-फिल्लिंग करते समय बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। कॉलेज की फीस, वहां की व्यवस्था और अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लें। देश के चिकित्सा शिक्षा ढांचे में हर एक सीट की कीमत बहुत ज्यादा है, इसलिए यह जरूरी है कि खाली पड़ी इन सीटों पर देश के योग्य और मेहनतकश युवाओं का अधिकार जल्द से जल्द तय किया जा सके।