रांची के बिरसा जैविक उद्यान में नन्हें मेहमान के आने से छाई खुशी की लहर
झारखंड की राजधानी रांची और इसके आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित बिरसा जैविक उद्यान (Birsa Biological Park) पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का बड़ा केंद्र रहा है। ओरमांझी में स्थित इस चिड़ियाघर में वन्यजीवों की देखरेख और उनके संरक्षण के लिए लगातार बेहतरीन प्रयास किए जाते हैं। हाल ही में इस पार्क से एक बेहद सुखद और उत्साह बढ़ाने वाली खबर सामने आई है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। बिरसा जैविक उद्यान में एक नन्हे दरियाई घोड़े (Hippo) का जन्म हुआ है, जिससे पार्क के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। जन्म के बाद से ही यह छोटा मेहमान अपनी हरकतों और मां के साथ बिताए जाने वाले पलों के कारण सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। पार्क प्रशासन द्वारा इस नवजात शिशु की विशेष देखरेख की जा रही है और उसके स्वास्थ्य पर लगातार पशु चिकित्सकों की पैनी नजर बनी हुई है।
मां और नन्हा शावक दोनों पूरी तरह स्वस्थ, पशु चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया विशेष ख्याल
किसी भी वन्यजीव पार्क में जब किसी नए शावक का जन्म होता है, तो उसकी शुरुआती देखभाल बहुत चुनौतीभरी और संवेदनशील मानी जाती है। बिरसा जैविक उद्यान के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि मादा दरियाई घोड़े ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है और जन्म के बाद से ही मां और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ और सक्रिय हैं। पार्क के अनुभवी पशु चिकित्सकों और कीपर्ज की टीम लगातार उन पर निगरानी रख रही है। नन्हे शावक के खान-पान, उसकी मां के दूध पीने के तौर-तरीकों और उनके बाड़े के तापमान को बिल्कुल अनुकूल रखा गया है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। पर्यटकों की सुरक्षा और मां के अत्यधिक सुरक्षात्मक स्वभाव को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस परिवार को कुछ हफ्तों के लिए विशेष बाड़े में रखा गया है, जहां आगंतुकों को एक सुरक्षित दूरी से इनके दीदार करने की व्यवस्था की जा रही है।
इस नए मेहमान के आने से बिरसा जैविक उद्यान में अब कितनी हो गई है दरियाई घोड़ों की कुल संख्या?
इस नन्हें शावक के जन्म लेने के बाद बिरसा जैविक उद्यान में दरियाई घोड़ों (Hippopotamuses) के कुनबे में इजाफा हो गया है। पार्क के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस नए मेहमान के जुड़ने से अब ओरमांझी जू में दरियाई घोड़ों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे पहले पार्क में एक नर और दो मादा दरियाई घोड़े मौजूद थे, जिनकी देखरेख बहुत ही वैज्ञानिक और प्राकृतिक वातावरण में की जा रही थी। चिड़ियाघर प्रबंधन का कहना है कि जब भी किसी शावक का जन्म पार्क के प्राकृतिक आवास के भीतर होता है, तो यह इस बात का प्रमाण होता है कि वहां के वन्यजीवों को रखा जाने वाला माहौल और खान-पान उनकी प्रजनन क्षमता के पूरी तरह अनुकूल है। आने वाले कुछ हफ्तों बाद जब इस नन्हे दरियाई घोड़े को आम पर्यटकों के दर्शन के लिए खुले बाड़े में छोड़ा जाएगा, तो यह रांची आने वाले सैलानियों, विशेषकर बच्चों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनने वाला है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के लिहाज से रांची के इस जू के लिए क्यों खास है यह पल?
बिरसा जैविक उद्यान झारखंड राज्य का एक प्रमुख और बेहद लोकप्रिय कंजर्वेशन सेंटर है, जहां देश-विदेश से आने वाले तमाम वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। यहां केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि लुप्तप्राय हो रहे जीवों के संरक्षण और उनके प्रजनन पर भी विशेष वैज्ञानिक ध्यान दिया जाता है। समय-समय पर बाघ, तेंदुए, शेर, भालू और अब दरियाई घोड़ों जैसे जलीय जीवों के कुनबे में होने वाली यह वृद्धि इस बात को साबित करती है कि झारखंड का यह पार्क वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार मील के पत्थर साबित कर रहा है। पार्क के निदेशक और कर्मचारियों का मानना है कि इस तरह की खुशखबरी से न केवल जू की लोकप्रियता बढ़ती है, बल्कि आम जनता और विशेषकर युवा पीढ़ी के भीतर प्रकृति और जानवरों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता भी जागृत होती है। यदि आप भी इस वीकेंड रांची घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो बिरसा जैविक उद्यान जाकर इस नन्हे और बेहद प्यारे दरियाई घोड़े की एक झलक पाने का सुनहरा मौका बिल्कुल न गंवाएं।