झारखंड में फिर गूंजी ED की सायरन सीए नरेश केजरीवाल समेत 15 जगहों पर छापेमारी, आखिर माजरा क्या है?

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News India Live, Digital Desk : झारखंड में लगता है 'एक्शन' अभी खत्म नहीं हुआ है। राजधानी रांची आज एक बार फिर तब सहम गई जब सुबह-सुबह केंद्रीय जांच एजेंसी यानी ED की टीम ने अलग-अलग ठिकानों पर धावा बोल दिया।

चर्चा का विषय बने हैं सीए नरेश केजरीवाल (CA Naresh Kejriwal)। जी हाँ, वही नाम जो पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग और शायद पहले से ज्यादा गंभीर है। खबर है कि यह छापेमारी सिर्फ रांची तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों (जैसे दिल्ली और एनसीआर) में भी करीब 15 से ज्यादा ठिकानों पर जांच चल रही है।

मामला क्या है? PMLA नहीं, अब 'फेमा' की बारी!

आमतौर पर हम झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की खबरें सुनते हैं, लेकिन इस बार ED ने FEMA (Foreign Exchange Management Act) के तहत कार्रवाई की है। आसान भाषा में कहें तो, शक यह है कि पैसों की हेराफेरी सिर्फ देश के अंदर नहीं, बल्कि विदेशों तक हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, ED को इनपुट मिला था कि बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) का नियम तोड़ा गया है। कुछ ऐसे लेन-देन मिले हैं जो सीधे तौर पर हवाला या विदेशी निवेश की तरफ इशारा करते हैं। और इसी कड़ी को जोड़ने के लिए जांच एजेंसी नरेश केजरीवाल के दफ्तर और घर पहुंची है।

नरेश केजरीवाल ही क्यों?

अगर आप झारखंड की ख़बरें फॉलो करते हैं, तो आपको याद होगा कि नरेश केजरीवाल का नाम चर्चित IAS पूजा सिंघल मामले और माइनिंग स्कैम के दौरान भी सामने आया था। वे पहले गिरफ्तार भी हो चुके हैं। वे कई रसूखदार लोगों के 'हिसाब-किताब' संभालते रहे हैं।

लोगों के मन में सवाल है कि क्या पुरानी जांच में ही कुछ नया मिला है? या फिर यह कोई बिल्कुल नई फाइल खोली गई है? बताया जा रहा है कि कुछ पुराने तार अब विदेशी ट्रांजेक्शन से जुड़ते दिख रहे हैं, जिसकी तह तक जाने की कोशिश हो रही है।

शहर में क्या माहौल है?

सुबह जैसे ही यह खबर फैली, रांची के सियासी गलियारों और नौकरशाहों (Bureaurcrats) के बीच सन्नाटा पसर गया। सीए नरेश केजरीवाल का ऑफिस हो या उनके सहयोगियों के घर, हर जगह सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों का पहरा है। अंदर फाइलों को खंगाला जा रहा है, कंप्यूटर की जांच हो रही है और सवाल-जवाब का दौर जारी है।

आम जनता के लिए इसका मतलब

भ्रष्टाचार के खिलाफ जब भी ऐसी बड़ी कार्रवाई होती है, तो यह उम्मीद जागती है कि सिस्टम साफ हो रहा है। विदेशी फंडिंग या फेमा का मामला देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है। अब देखना यह होगा कि शाम तक ED को इन छापों से क्या बरामद होता है। क्या नोटों के पहाड़ मिलेंगे या फिर विदेशी बैंकों के राज खुलेंगे? नजर बनाए रखिये, क्योंकि झारखंड में अभी 'पिक्चर बाकी है'।