छत्तीसगढ़ में ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी,रायपुर से रायगढ़ तक अफसरों और रसूखदारों में मचा हड़कंप
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ की सुबह इस बार केवल ठंड और कोहरे वाली नहीं रही, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में 'ईडी' के छापों ने माहौल काफी गर्म कर दिया। हम सब जानते हैं कि विकास के लिए हाईवे बनना कितना ज़रूरी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सड़कों के किनारे वाली जिस जमीन को देखकर हम तरक्की का सपना देखते हैं, उसके पीछे कितना बड़ा 'मायाजाल' हो सकता है?
ताज़ा मामला केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना 'भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट' से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण के दौरान हुई भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर छत्तीसगढ़ के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सिर्फ राजधानी रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार रायगढ़ और बिलासपुर जैसे शहरों से भी जुड़ रहे हैं।
हुआ क्या था इस 'जमीन घोटाले' में?
प्रोजेक्ट तो सड़कों का है, लेकिन खेल जमीनों के मुआवजे (Compensation) का है। हुआ यूँ कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जब जमीनें सरकार को लेनी थीं, तब कथित तौर पर कुछ रसूखदारों और अफसरों ने मिलीभगत कर मुआवजे की राशि में बड़ा हेरफेर किया। कहा जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने को तगड़ी चपत लगाई गई। मुआवजे का जो पैसा असली हकदार तक जाना था, उसका बड़ा हिस्सा बीच के रास्तों से गायब कर दिया गया।
ED की राडार पर कौन है?
आज सुबह जब रायपुर के कई पॉश इलाकों में गाड़ियां रुकीं और सुरक्षाबल बाहर आए, तो साफ़ हो गया कि जाँच एजेंसियां अब काफी पुख्ता तैयारी के साथ आई हैं। छापेमारी में जमीन से जुड़े कुछ कागजात, डिजिटल गैजेट्स और करोड़ों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की डिटेल्स खंगाली जा रही हैं। जिन लोगों के घर या दफ्तर पर छापे पड़े हैं, उनमें सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ बड़े बिल्डर्स और रीयल एस्टेट से जुड़े लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच का ये सिलसिला कहाँ तक जाएगा?
हकीकत तो ये है कि छत्तीसगढ़ में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता नई नहीं है, लेकिन इस बार मामला 'भारतमाला प्रोजेक्ट' जैसे नेशनल लेवल के बुनियादी ढांचे से जुड़ा है। ऐसे में जाँच की आंच उन सफेदपोश चेहरों तक भी पहुँच सकती है जिन्होंने विकास के नाम पर अपनी जेब भरने की कोशिश की है। फिलहाल ईडी की टीम अलग-अलग जगहों पर पूछताछ और जब्ती में जुटी है।
आम जनता बस यही उम्मीद करती है कि जो सड़के उनके सफर को आसान बनाने वाली हैं, उनकी बुनियाद में कम से कम भ्रष्टाचार का पत्थर न लगा हो। अब देखना ये है कि फाइलों के इन ढेरों से क्या बाहर आता है—सच्चाई या कुछ और गहरे राज।