फटे जूते और फाइटर जेट का सपना, आखिर क्यों इंडिया का नाम लेकर दुनिया को ठगना चाहता है पाकिस्तान?
News India Live, Digital Desk : आजकल पाकिस्तान की हालत किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ आटा-दाल के लिए मारामारी मची है, तो दूसरी तरफ इनके हुक्मरानों को नए-नए खिलौनों (लड़ाकू विमानों) का शौक चढ़ा है। हाल ही में जो खबरें निकलकर सामने आ रही हैं, वो वाकई हैरान करने वाली भी हैं और थोड़ी हंसी वाली भी। दरअसल, कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब चीन से 'J-15' फाइटर जेट्स लेने की फिराक में है, और मज़ेदार बात ये है कि इसके लिए वो हमेशा की तरह 'इंडिया कार्ड' खेल रहा है।
आखिर ये पूरा माजरा क्या है?
देखा जाए तो पाकिस्तान की इकॉनमी इस समय वेंटिलेटर पर है। कर्ज के नीचे दबे होने के बावजूद ये अपनी जनता को यह समझाना चाहते हैं कि भारत की बढ़ती ताकत से उन्हें बहुत बड़ा खतरा है। अब देखिए, भारत की नेवी जिस तरह से हिंद महासागर (Indian Ocean) में अपनी धक जमा रही है, उसे देख पाकिस्तान को पसीने आ रहे हैं। इसी बहाने वो दुनिया और खासतौर पर अपने 'सदाबहार दोस्त' चीन को यह यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसे J-15 जैसे आधुनिक जेट नहीं मिले, तो क्षेत्र का बैलेंस बिगड़ जाएगा।
भारत का नाम लेना मजबूरी है या रणनीति?
पाकिस्तान को बहुत अच्छे से पता है कि बिना 'भारत' का नाम लिए न तो उसे देश के अंदर तवज्जो मिलेगी और न ही चीन से हथियारों की कोई डील आसान होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल हथियारों की भूख नहीं है, बल्कि अपनी बिगड़ती आर्थिक स्थिति से ध्यान भटकाने का एक तरीका है। जब पेट खाली होता है, तो अक्सर सत्ताधारी लोग 'खतरे' की कहानियां सुनाने लगते हैं। यहाँ भी वही हो रहा है।
चीन के साथ क्या चल रही है खिचड़ी?
खबरों की मानें तो पाकिस्तान अपनी नेवी को और आधुनिक बनाना चाहता है। लेकिन सवाल वही आता है—पैसे कहाँ से आएंगे? क्या चीन फिर से कर्ज के जाल में उसे फंसाएगा या पाकिस्तान इसे किसी 'खैरात' की उम्मीद में मांग रहा है? असल में, पाकिस्तान चाहता है कि उसे 'हॉट डील' मिल जाए और वह भारत के बढ़ते एयरक्राफ्ट कैरियर के जवाब में अपनी ताकत दिखा सके।
एक कड़वा सच
सच तो यह है कि दुनिया अब पाकिस्तान की इन चालों को समझने लगी है। एक तरफ आप आईएमएफ (IMF) के सामने कटोरा लेकर खड़े हैं और दूसरी तरफ करोड़ों डॉलर के युद्धक विमानों की बात कर रहे हैं। क्या सच में ये विमान पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए हैं, या बस एक नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश ताकि सत्ता की कुर्सी सलामत रहे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।