नवरात्रि में गलती से टूट जाए व्रत तो न हों परेशान माँ दुर्गा से मांगें माफी और करें ये 5 उपाय, नहीं लगेगा दोष
News India Live, Digital Desk: चैत्र हो या शारदीय, नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्त पूरी श्रद्धा और कठोर नियमों के साथ मां दुर्गा की उपासना करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों तक निराहार या फलाहार व्रत रखते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में, भूलवश या शारीरिक अस्वस्थता के कारण व्रत टूट जाता है। ऐसे में भक्त अक्सर डर जाते हैं या ग्लानि (Guilt) महसूस करने लगते हैं कि कहीं माता रानी नाराज न हो जाएं। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस स्थिति के लिए विशेष समाधान बताए गए हैं। अगर आपसे भी जाने-अनजाने में व्रत खंडित हो जाए, तो घबराने के बजाय इन सरल उपायों को अपनाकर आप अपना दोष दूर कर सकते हैं।
माँ से मांगें क्षमा और करें 'क्षमा प्रार्थना' का पाठ
शास्त्रों के अनुसार, ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, न कि भोजन के। अगर भूलवश आपने कुछ खा लिया है, तो सबसे पहले शांत मन से देवी दुर्गा की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़े हों और अपनी गलती स्वीकार करें। दुर्गा सप्तशती के अंत में दिए गए 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है। सच्चे मन से मांगी गई माफी से माता रानी अपने भक्तों के अनजाने अपराधों को क्षमा कर देती हैं।
गंगाजल से शुद्धिकरण और स्नान
यदि व्रत के दौरान अभक्ष्य (जो व्रत में नहीं खाना चाहिए) वस्तु का सेवन हो जाए, तो शरीर और मन की शुद्धि आवश्यक है। इसके लिए आप दोबारा स्नान करें और जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर आचमन करें। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इससे वातावरण और अंतर्मन की नकारात्मकता दूर होती है और आप पुनः पूजन के लिए तैयार हो जाते हैं।
मूर्तियों का अभिषेक और श्रृंगार
व्रत खंडित होने के दोष को दूर करने के लिए माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर का गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करना शुभ होता है। इसके बाद माता को लाल चुनरी, फल और फूल अर्पित करें। माँ को श्रृंगार की वस्तुएं भेंट करने से वे प्रसन्न होती हैं और साधक के मन का संताप दूर होता है।
दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज
हिंदू धर्म में दान को सबसे बड़ा प्रायश्चित माना गया है। यदि आपका व्रत टूट गया है, तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। आप किसी ब्राह्मण को भोजन करा सकते हैं या गाय को चारा खिला सकते हैं। दान करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और व्रत का पुण्य फल पुनः प्राप्त होने लगता है।
हवन और मंत्रों का जाप
प्रायश्चित के रूप में आप घर पर छोटा सा हवन कर सकते हैं। "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र की एक माला का जाप करना भी मन को शांति देता है और व्रत के संकल्प को पुनः जाग्रत करता है। याद रखें, भक्ति में शुद्धता से ज्यादा 'भाव' का महत्व है। यदि मन साफ है और गलती अनजाने में हुई है, तो देवी कभी कुपित नहीं होतीं।