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March 24 2026 08:53 pm

अनजाने में पहनी गई अंगूठी बदल सकती है आपकी किस्मत भूलकर भी न पहनें दूसरों के रत्न, वरना कंगाल बना सकते हैं ये 5 स्टोन

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News India Live, Digital Desk: रत्न शास्त्र (Gemology) में रत्नों को ग्रहों की शक्ति का पुंज माना गया है। सही रत्न जहाँ रंक को राजा बना सकता है, वहीं गलत तरीके से धारण किया गया पत्थर जीवन में भूचाल ला सकता है। अक्सर लोग फैशन के तौर पर या किसी करीबी की दी हुई अंगूठी शौक में पहन लेते हैं, लेकिन ज्योतिषियों की मानें तो यह आदत आपके सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल सकती है। रत्नों का सीधा संबंध हमारी ऊर्जा और शरीर के 'आभामंडल' (Aura) से होता है। आइए जानते हैं रत्न धारण करने के वे कड़े नियम, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है।

दूसरों की अंगूठी पहनना क्यों है खतरनाक?

रत्न शास्त्र के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक कोई रत्न पहनता है, तो वह पत्थर उस व्यक्ति की ऊर्जा, उसके ग्रहों के प्रभाव और उसके कर्मों के फल को अवशोषित (Absorb) कर लेता है। यदि आप किसी दूसरे की पहनी हुई अंगूठी पहनते हैं, तो उस व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा या उसके ग्रहों का अशुभ प्रभाव आपके जीवन में प्रवेश कर सकता है। इससे न केवल आपके काम बिगड़ सकते हैं, बल्कि मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी घेर सकती हैं।

रत्न धारण करने से पहले 'शुद्धिकरण' है अनिवार्य

बाजार से लाए गए नए रत्न को भी सीधे धारण नहीं करना चाहिए। रत्न कई हाथों से होकर आप तक पहुँचता है, इसलिए उसकी शुद्धि जरूरी है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले उसे गंगाजल और कच्चे दूध के मिश्रण में कुछ समय के लिए रखें। इसके बाद संबंधित ग्रह के मंत्रों का जाप करते हुए विधिवत पूजन करें। याद रखें, बिना प्राण-प्रतिष्ठा और शुद्धिकरण के पहना गया रत्न केवल एक पत्थर के समान है, जो कोई लाभ नहीं देता।

इन रत्नों के मेल से बचें: हो सकता है बड़ा नुकसान

ज्योतिष में कुछ ग्रहों की आपस में शत्रुता होती है, इसलिए उनके रत्नों को एक साथ पहनना वर्जित है। उदाहरण के तौर पर:

माणिक्य (सूर्य) के साथ नीलम (शनि) पहनना गृह क्लेश और दुर्घटना का कारण बन सकता है।

मोती (चंद्रमा) के साथ गोमेद (राहू) पहनने से मानसिक अशांति और भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

पुखराज (गुरु) और हीरा (शुक्र) का मेल भी कई बार वैवाहिक जीवन में तनाव ला सकता है।

खंडित या घिसे हुए रत्न तुरंत बदलें

यदि आपकी अंगूठी का पत्थर कहीं से चटक गया है, टूट गया है या उसका रंग फीका पड़ गया है, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। खंडित रत्न अशुभ फल देने लगते हैं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देते हैं। साथ ही, रत्नों की एक निश्चित समयावधि होती है। जैसे मोती और मूंगा जल्दी घिस जाते हैं, वहीं नीलम और पन्ना लंबे समय तक चलते हैं। प्रभाव खत्म होने पर नया रत्न धारण करना ही श्रेयस्कर है।

उंगली और धातु का भी रखें ध्यान

हर रत्न के लिए एक विशिष्ट उंगली और धातु (सोना, चांदी, तांबा या पंचधातु) निर्धारित है। जैसे पुखराज हमेशा तर्जनी (Index Finger) में और सोना धातु में पहनना चाहिए, जबकि नीलम बीच की उंगली (Middle Finger) में और लोहे या पंचधातु में पहनना शुभ होता है। गलत उंगली में रत्न पहनने से उसका प्रभाव विपरीत हो सकता है। किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बिना कभी भी कोई रत्न धारण न करें।