डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी कानूनी हार कौन हैं भारतीय मूल के नील कत्याल, जिन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हिला दी राष्ट्रपति की कुर्सी?
News India Live, Digital Desk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम 'ग्लोबल टैरिफ' (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। ट्रंप की इस ऐतिहासिक हार के पीछे जिस शख्स का दिमाग है, वह कोई और नहीं बल्कि भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कत्याल (Neal Katyal) हैं।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति ट्रंप ने साल 2025 की शुरुआत में 1977 के एक पुराने कानून (IEEPA) का हवाला देते हुए लगभग हर देश से आने वाले सामान पर भारी टैक्स लगा दिया था। उनका तर्क था कि यह 'आपातकालीन शक्तियों' का हिस्सा है। लेकिन नील कत्याल ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
6-3 के बहुमत से आए फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिका में टैक्स लगाने या बदलने का अधिकार सिर्फ संसद (कांग्रेस) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। इस फैसले के बाद अब सरकार को वसूले गए लगभग 133 अरब डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) कंपनियों को वापस करने पड़ सकते हैं।
कौन हैं नील कत्याल? (Neal Katyal Profile)
शिकागो में जन्मे नील कत्याल के माता-पिता भारतीय प्रवासी थे। उनकी मां एक डॉक्टर और पिता इंजीनियर थे। नील की गिनती आज अमेरिका के सबसे ताकतवर वकीलों में होती है:
रिकॉर्ड तोड़ करियर: नील कत्याल अब तक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा केस लड़ चुके हैं। उन्होंने महान वकील थर्गुड मार्शल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।
ओबामा सरकार में अहम पद: वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिका के 'एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल' रह चुके हैं।
ट्रंप के पुराने 'दुश्मन': यह पहली बार नहीं है जब नील ने ट्रंप को चुनौती दी है। इससे पहले उन्होंने ट्रंप के विवादित 'ट्रैवल बैन' और कई अन्य फैसलों के खिलाफ भी कोर्ट में जीत हासिल की है।
जॉर्ज फ्लॉयड केस: मशहूर जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में भी उन्होंने विशेष अभियोजक (Special Prosecutor) के रूप में काम किया था।
नील कत्याल की बड़ी जीत के मायने
फैसले के बाद नील कत्याल ने गर्व से कहा, "आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कानून के शासन और संविधान की रक्षा की है। संदेश साफ है राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन हमारा संविधान उनसे भी ऊपर है।" विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मिसाल है कि कोई भी राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर संसद के अधिकारों को नहीं छीन सकता।