Greenland Citizens : 84 लाख रुपये और अमेरिकी नागरिकता? ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए डोनाल्ड ट्रंप का अब तक का सबसे बड़ा दांव
News India Live, Digital Desk : अक्सर हम प्रॉपर्टी या गाड़ियां खरीदते हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का विजन इससे कहीं ऊपर है—वो पूरा का पूरा द्वीप खरीदना चाहते हैं। और इस बार उनका तरीका कूटनीतिक कम और 'व्यापारिक' ज्यादा नजर आ रहा है।
क्या है ट्रंप का 'एक लाख डॉलर' वाला फॉर्मूला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए वहां के हर नागरिक को $100,000 (यानी भारतीय रुपयों में करीब 84-85 लाख रुपये) देने का प्रस्ताव रख सकते हैं। सुनने में यह किसी लॉटरी जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ा गणित है।
गणित बहुत सीधा है!
ग्रीनलैंड की कुल आबादी सिर्फ 56,000 से 57,000 के आसपास है। अगर ट्रंप हर नागरिक को 1 लाख डॉलर देते हैं, तो कुल खर्च लगभग 5.6 से 6 बिलियन डॉलर आएगा। अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए यह रकम कुछ भी नहीं है। यह उतनी ही रकम है जितनी अमेरिका शायद किसी एक सैन्य मिशन पर खर्च कर देता है। ट्रंप को लगता है कि अगर वहां की जनता के हाथ में इतनी बड़ी रकम और अमेरिका का पासपोर्ट थमा दिया जाए, तो वे खुद अमेरिका में शामिल होने की मांग करने लगेंगे।
आखिर ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप?
कई लोग सोच रहे होंगे कि सिर्फ बर्फ से ढकी जमीन के लिए इतना तामझाम क्यों? असल में ग्रीनलैंड की लोकेशन और उसके अंदर दबा खजाना ही इसकी असली वजह है।
- बर्फ के नीचे सोना: वहां 'रेयर अर्थ मिनरल्स' का विशाल भंडार है, जिससे दुनिया की भविष्य की तकनीक चलेगी।
- चीन को रोकने का रास्ता: अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर काबिज होता है, तो वह आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती दादागिरी को जड़ से खत्म कर सकता है।
क्या डेनमार्क और वहां के लोग मानेंगे?
हालांकि पैसा बहुत कुछ कर सकता है, लेकिन 'देश की भावना' और 'आजादी' बेचना इतना आसान नहीं होता। डेनमार्क ने पहले ही इस तरह के ऑफर्स को भद्दा मजाक बताया है। वहां के नागरिकों के लिए उनकी पहचान और संस्कृति एक लाख डॉलर से कहीं ज्यादा कीमती है।