Palmistry Sign : क्या आपकी हथेली में भी है शिव योग? महादेव की विशेष कृपा पाने वालों के हाथ में होते हैं ये 3 खास निशान
News India Live, Digital Desk: हस्तरेखा शास्त्र (Palmistry) के अनुसार, हमारी हथेलियाँ हमारे भाग्य और व्यक्तित्व का दर्पण होती हैं। हाथों की लकीरें न केवल भविष्य की ओर इशारा करती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि आप पर किस देवता की विशेष कृपा है। ज्योतिष शास्त्र में 'शिव योग' (Shiv Yog) को अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना गया है। माना जाता है कि जिनकी हथेली में भगवान शिव के प्रतीक चिन्ह होते हैं, उनका जीवन रक्षक स्वयं महादेव होते हैं।
हथेली में 'शिव योग' के 3 चमत्कारी संकेत
हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपके हाथ में नीचे दिए गए निशान मौजूद हैं, तो आप पर शिव जी का आशीर्वाद है:
1. त्रिशूल का निशान (The Trident Sign)
हथेली में त्रिशूल का होना सबसे शक्तिशाली संकेतों में से एक है।
स्थान: यदि हृदय रेखा (Heart Line) के अंत में गुरु पर्वत (बृहस्पति) या शनि पर्वत के पास त्रिशूल बन रहा हो, तो ऐसे व्यक्ति बहुत भाग्यशाली होते हैं।
प्रभाव: ऐसे लोग समाज में मान-सम्मान पाते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। शिव जी की कृपा से इनके बिगड़े काम बन जाते हैं।
2. डमरू की आकृति (The Damru Sign)
हथेली के बीच में या पर्वत क्षेत्रों पर डमरू जैसी आकृति का बनना अत्यंत दुर्लभ है।
प्रभाव: यह निशान कला, संगीत और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर इशारा करता है। ऐसे व्यक्ति धार्मिक स्वभाव के होते हैं और उनकी अंतरात्मा (Intuition) बहुत मजबूत होती है। इन्हें जीवन में कभी भी धन और अन्न की कमी नहीं होती।
3. पर्वत पर 'ॐ' का चिन्ह
यदि किसी की हथेली में रेखाओं के संयोग से 'ॐ' (Om) की आकृति उभरती है, तो इसे साक्षात शिव का वास माना जाता है।
स्थान: यह चिन्ह अक्सर सूर्य पर्वत या हथेली के मध्य (राहु क्षेत्र) में देखा जाता है।
प्रभाव: ऐसे लोगों पर आकस्मिक संकट नहीं आते। इनकी रक्षा स्वयं महाकाल करते हैं और इन्हें मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर माना जाता है।
शिव कृपा पाने के लिए क्या करें?
यदि आपके हाथ में ये निशान हैं, तो अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए निम्न उपाय करें:
सोमवार का व्रत: भगवान शिव को समर्पित सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं।
महामृत्युंजय मंत्र: प्रतिदिन 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इससे हथेली की शुभ रेखाएं और अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं।
विशेष नोट: हस्तरेखा शास्त्र एक प्राचीन विद्या है, लेकिन याद रखें कि कर्म ही प्रधान है। शुभ रेखाएं होने पर भी सत्कर्म करना अनिवार्य है ताकि उनका पूर्ण फल मिल सके।