खरमास और मलमास को एक समझने की भूल न करें, जानें 2026 में कब थमेगी शहनाइयों की गूंज और क्या है इनका अंतर

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News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में समय की गणना का विशेष महत्व है। अक्सर लोग 'खरमास' और 'मलमास' को एक ही मान लेते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। साल 2026 धार्मिक दृष्टि से बहुत खास होने वाला है क्योंकि इस साल 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। आइए जानते हैं कि 2026 में खरमास और मलमास कब लग रहे हैं और इनमें असली अंतर क्या है।

क्या होता है खरमास? (What is Kharmas)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की राशियों (धनु और मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है। सूर्य के इस गोचर काल को 'खरमास' कहा जाता है। खरमास साल में दो बार आता है। इस दौरान सूर्य का तेज कम होने के कारण मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश वर्जित होते हैं।

2026 में खरमास की तिथि: साल 2026 का पहला खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल (मेष संक्रांति) तक रहेगा।

क्या है मलमास या अधिक मास? (What is Malmas/Adhik Maas)

मलमास को 'अधिक मास' या 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है। यह हर तीन साल में एक बार आता है। सूर्य वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच के 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम दिया है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

2026 में मलमास की तिथि: साल 2026 में मलमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस साल ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा।

खरमास और मलमास में मुख्य अंतर

समय का अंतर: खरमास साल में दो बार (दिसंबर-जनवरी और मार्च-अप्रैल) आता है, जबकि मलमास हर तीन साल में केवल एक बार आता है।

कारण: खरमास सूर्य के राशि परिवर्तन (धनु और मीन) से संबंधित है, जबकि मलमास चंद्र और सूर्य कैलेंडर के सामंजस्य के लिए बनाया गया है।

धार्मिक महत्व: खरमास को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए 'अशुभ' माना जाता है, लेकिन मलमास (अधिक मास) भगवान विष्णु की भक्ति, दान और जप-तप के लिए अत्यंत 'पवित्र' माना जाता है।