शरीर के ये 5 इशारे नजरअंदाज न करें, डॉक्टर ने बताया सर्वाइकल कैंसर का सच, जानें और सतर्क रहें
News India Live, Digital Desk: हम भारतीय महिलाओं की एक आदत होती है हल्के-फुल्के दर्द या शरीर में हो रहे बदलावों को "अरे, कुछ नहीं, ठीक हो जाएगा" कहकर टाल देना। कभी घर की जिम्मेदारी, तो कभी संकोच। लेकिन स्वास्थ्य के मामले में यही चुप्पी कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाती है।
आज हम बात कर रहे हैं 'सर्वाइकल कैंसर' (Cervical Cancer) की, जो भारत में महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। हाल ही में डॉ. मीरा पाठक ने इसके कुछ ऐसे शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया है, जिन्हें अगर समय रहते पहचान लिया जाए, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को टाला जा सकता है।
वो 'खतरे की घंटियां' जिन्हें हमें सुनना चाहिए
सर्वाइकल कैंसर, यानी बच्चेदानी के मुंह का कैंसर, रातों-रात नहीं होता। हमारा शरीर हमें पहले ही संकेत देने लगता है। डॉ. पाठक के अनुसार, इन बदलावों पर हर महिला को गौर करना चाहिए:
- असमय ब्लीडिंग (Irregular Bleeding): अगर आपको पीरियड्स के बीच में, या मेनोपॉज (माहवारी बंद होने) के बाद भी खून के धब्बे दिखें या ब्लीडिंग हो, तो यह नॉर्मल नहीं है। इसे इग्नोर न करें।
- संबंध बनाते समय दर्द: शारीरिक संबंध बनाते वक्त अगर असामान्य दर्द हो या उसके बाद ब्लीडिंग हो, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
- वजाइनल डिस्चार्ज (Vaginal Discharge): अगर डिस्चार्ज में बहुत ज्यादा बदबू आ रही है, रंग बदला हुआ है (जैसे खूनी या मटमैला), तो यह इन्फेक्शन से बढ़कर कैंसर का लक्षण हो सकता है।
- कमर और पैरों में लगातार दर्द: काम की थकान समझकर हम अकसर इसे टाल देते हैं, लेकिन अगर पेल्विक (पेट के निचले हिस्से) में लगातार भारीपन या दर्द बना रहे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
घबराने की जरूरत नहीं, बस थोड़ी समझदारी चाहिए
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) होता है। अच्छी खबर यह है कि यह एकमात्र ऐसा कैंसर है जिससे वैक्सीन (टीके) के जरिए बचा जा सकता है।
आपको क्या करना है?
- संकोच छोड़े: अगर ऊपर बताया गया कोई भी लक्षण दिखे, तो शर्म न करें। सीधे गाइनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से मिलें।
- पैप स्मियर टेस्ट (Pap Smear): यह 5 मिनट का एक साधारण सा टेस्ट है। 30 साल की उम्र के बाद हर महिला को इसे नियमित रूप से करवाना चाहिए। यह टेस्ट कैंसर बनने से पहले ही कोशिकाओं में गड़बड़ी पकड़ लेता है।
- बेटियों को वैक्सीन: अगर आपके घर में 9 से 14 साल की बच्चियां हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर उन्हें HPV वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह भविष्य में उनकी सुरक्षा कवच बनेगा।