पूर्व केंद्रीय मंत्री की बढ़ीं मुश्किलें, धोखाधड़ी मामले में मिली राहत को ऊपरी अदालत ने पलटा, फिर से होगी सुनवाई
News India Live, Digital Desk: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई दिख रही हैं। जमीन से जुड़े एक धोखाधड़ी के मामले में जहां कुछ महीने पहले दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, वहीं अब एक ऊपरी अदालत (सेशन कोर्ट) ने उस फैसले को पलट दिया है। सेशन कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनने का आदेश दिया है, जिससे भंवर जितेंद्र सिंह और उनके परिवार को मिली राहत चंद दिनों की ही साबित हुई।
यह मामला राजस्थान के अलवर में एक बेशकीमती जमीन की बिक्री से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि पूर्व मंत्री और उनके परिवार ने एक ऐसी जमीन बेच दी जो पहले ही सरकार द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी थी।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद अलवर की 'फूल बाग' नाम की एक संपत्ति से जुड़ा है। सुरेंद्र सिंह नाम के एक व्यक्ति ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें यह संपत्ति बेची थी। लेकिन जब उन्होंने संपत्ति पर कब्जा लेना चाहा, तो पता चला कि जमीन का एक बड़ा हिस्सा तो पहले ही सरकार द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जानकारी उनसे छिपाई गई और उनके साथ धोखाधड़ी की गई। इसी शिकायत पर लंबी सुनवाई के बाद, इसी साल जनवरी में दिल्ली की एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने सबूतों के अभाव में मामले को खारिज कर दिया था और भंवर जितेंद्र सिंह को राहत मिल गई थी।
ऊपरी अदालत ने क्यों पलटा फैसला?
मजिस्ट्रेट अदालत के इस फैसले के खिलाफ शिकायतकर्ता सुरेंद्र सिंह ने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एडिशनल सेशन जज सचिन जैन ने मामले की सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले पर कड़ी टिप्पणी की।
जज ने अपने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए तथ्यों और सबूतों पर ठीक से विचार किए बिना ही मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह मामला पहली नजर में धोखाधड़ी का बनता है और इसमें गहराई से जांच की जरूरत है। सेशन कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट का यह मानना कि कोई अपराध नहीं हुआ, यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला लगता है।
अब सेशन कोर्ट ने इस मामले की फाइल को वापस मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया है और आदेश दिया है कि इस पर नए सिरे से सुनवाई की जाए। इसका मतलब है कि भंवर जितेंद्र सिंह को एक बार फिर इस पूरे कानूनी का सामना करना पड़ेगा।
यह फैसला पूर्व केंद्रीय मंत्री के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्हें लगा था कि वह इस मामले से पूरी तरह बाहर आ चुके हैं।