Diabetes & Dairy : क्या शुगर के मरीज पी सकते हैं दूध? जानें आयुर्वेद के अनुसार डेयरी प्रॉडक्ट्स के सेवन का सही तरीका और नियम
News India Live, Digital Desk : डायबिटीज एक ऐसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है जिसमें खान-पान का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण होता है। अक्सर लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि क्या मधुमेह के रोगियों को दूध, दही या पनीर का सेवन करना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार, डेयरी उत्पाद कफ वर्धक (Mucus forming) होते हैं, लेकिन यदि इन्हें सही तरीके और सही संयोजन के साथ लिया जाए, तो ये फायदेमंद भी हो सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार डायबिटीज में डेयरी उत्पादों का गणित
आयुर्वेद में डायबिटीज को 'प्रमेह' से जोड़ा जाता है। चूंकि दूध प्रकृति में भारी (गुरु) और मीठा (मधुर) होता है, इसलिए इसका सीधा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। लेकिन कुछ बदलावों के साथ इसे सुरक्षित बनाया जा सकता है:
1. दूध का सेवन: हल्दी और दालचीनी का मेल
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो सादा दूध पीने के बजाय उसमें हल्दी या दालचीनी का पाउडर मिलाकर उबालें।
फायदा: हल्दी इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करती है, जबकि दालचीनी मेटाबॉलिज्म को तेज करती है। दूध को हमेशा स्किम्ड (मलाई रहित) रखें।
2. दही के बजाय 'छाछ' (Buttermilk) है अमृत
आयुर्वेद डायबिटीज में दही के सेवन की सलाह कम देता है क्योंकि यह भारी और अभिष्यंदी (नसों में रुकावट पैदा करने वाला) होता है।
सही तरीका: दही की जगह ताजी छाछ पिएं। इसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक और थोड़ी सी हींग मिलाएं। यह पाचन में सुधार करता है और शुगर लेवल को स्थिर रखता है।
3. पनीर और छेना
डायबिटीज के मरीजों के लिए कच्चा पनीर प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकता है। हालांकि, इसे तलकर या भारी मसालों के साथ खाने से बचें। आयुर्वेद के अनुसार, कम वसा वाले दूध से घर पर निकाला गया ताज़ा छेना बेहतर विकल्प है।
इन 3 नियमों का रखें विशेष ध्यान
रात में दूध से बचें: आयुर्वेद के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को रात के समय दूध पीने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कफ बढ़ता है और सुबह शुगर लेवल हाई मिल सकता है। शाम का समय (सूर्यास्त के आसपास) इसके लिए बेहतर है।
विरुद्ध आहार न लें: दूध के साथ नमकीन चीजें, फल या मछली कभी न खाएं। यह 'विरुद्ध आहार' शरीर में टॉक्सिन्स (आमा) पैदा करता है, जो डायबिटीज की जटिलताओं को बढ़ा सकता है।
देसी घी की सीमित मात्रा: शुद्ध ए2 (A2) गाय का घी सीमित मात्रा में लिया जा सकता है, क्योंकि यह ओजस बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जा देता है।