विवादों के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा कदम आवास पर 101 बटुकों का किया सम्मान शंकराचार्य विवाद के बाद दिया सनातन संदेश

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने लखनऊ स्थित आवास पर एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने 101 बटुकों (बाल ब्राह्मणों) का विधि-विधान से पूजन किया, उन्हें भोजन कराया और दक्षिणा देकर सम्मानित किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिनों पहले प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिविर में उनकी शिखा (चोटी) को लेकर सोशल मीडिया पर एक विवाद खड़ा हो गया था।

1. बटुक पूजन और सम्मान (The Ceremony)

विधिवत पूजन: ब्रजेश पाठक ने खुद बटुकों के पैर धोए, उन्हें तिलक लगाया और आरती उतारी।

भोज और उपहार: बटुकों को पारंपरिक सात्विक भोजन कराया गया और उपहार स्वरूप धार्मिक पुस्तकें व अंगवस्त्र भेंट किए गए।

उद्देश्य: उन्होंने इस कार्यक्रम को 'संस्कृति की सेवा' बताया और कहा कि बटुक ही हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति और सनातन धर्म के ध्वजवाहक हैं।

2. माघ मेला 'शिखा विवाद' की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया था जब माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के एक अनुयायी ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई थी। हालांकि ब्रजेश पाठक ने सीधे तौर पर इस पर कोई तीखी टिप्पणी नहीं की, लेकिन 101 बटुकों का यह सार्वजनिक सम्मान उनके जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

3. राजनीतिक और सांस्कृतिक निहितार्थ

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन के जरिए डिप्टी सीएम ने दो बड़े संदेश दिए हैं:

ब्राह्मण समाज में पकड़: यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक और धार्मिक गुरुओं का बड़ा महत्व है। ऐसे आयोजन से वे समाज को अपनी जड़ों से जुड़ा होने का अहसास कराते हैं।

धार्मिक छवि: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह ही ब्रजेश पाठक भी खुद को एक कट्टर 'सनातन प्रेमी' नेता के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

क्या बोले ब्रजेश पाठक?

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक शक्ति और ऋषि परंपरा से है। बटुकों का सम्मान करना मेरा सौभाग्य है और हम अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव संकल्पित हैं।”