Democracy : यह चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत है ,संजय राउत ने खोला बिहार नतीजों का कच्चा-चिट्ठा
News India Live, Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। शिवसेना (उद्धव गुट) के वरिष्ठ नेता और 'सामना' के संपादक संजय राउत ने अपने अखबार के संपादकीय में इन नतीजों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पूरा मामला और गरमा गया है। राउत ने इन चुनाव परिणामों को लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है।
'महाराष्ट्र पैटर्न' का ज़िक्र क्यों?
संजय राउत ने बिहार के चुनावी नतीजों को चौंकाने वाला नहीं बताते हुए इसे 'महाराष्ट्र पैटर्न' की संज्ञा दी है। उनका आरोप है कि जिस तरह महाराष्ट्र में सत्ता में आने वाली निश्चित दिख रही आघाडी को 50 सीटों के अंदर समेट दिया गया, ठीक वैसा ही बिहार में भी हुआ। राउत का सीधा इशारा चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच मिलीभगत की ओर है। उनका मानना है कि जब चुनाव कराने वाली संस्था ही किसी एक पक्ष के साथ मिलकर काम करने लगे, तो निष्पक्ष नतीजों की उम्मीद कैसे की जा सकती है
लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल
'सामना' के संपादकीय में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि अगर देश में चुनाव प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं रहेगी तो लोकतंत्र का क्या होगा। राउत ने साफ तौर पर कहा है कि यह चुनावी नतीजा जनादेश नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का आदेश लगता है। उनका मानना है कि चुनाव आयोग की ऐसी कार्यशैली लोकतंत्र की कब्र खोदने के समान है। यह केवल एक चुनाव की हार-जीत का मामला नहीं है, बल्कि यह जनता के उस भरोसे का सवाल है जो पूरी चुनावी प्रक्रिया पर टिका होता है।
विपक्षी दलों द्वारा पहले भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और अन्य अनियमिताओं को लेकर आवाज उठाई जाती रही है। राउत का मानना है कि यह समय है जब सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक भविष्य की है। बिहार के इन नतीजों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए सिर्फ चुनाव कराना ही काफी नहीं, बल्कि उनका निष्पक्ष और भरोसेमंद होना भी उतना ही आवश्यक है।