कैंसर को दी मात फिर UPSC में गाड़ा झंडा, छत्तीसगढ़ के इस लाल ने 6 साल की जंग के बाद रचा इतिहास

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News India Live, Digital Desk: कामयाबी की राह में मुश्किलें तो बहुत आती हैं, लेकिन जब इरादे फौलादी हों, तो मौत को भी पीछे हटना पड़ता है। छत्तीसगढ़ के एक युवा ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। पिछले 6 साल से जानलेवा कैंसर से जूझ रहे इस जांबाज ने न केवल बीमारी को हराया, बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC को अपने तीसरे प्रयास में क्रैक कर एक मिसाल कायम की है।

6 साल का लंबा संघर्ष: अस्पताल के बेड से किताबों तक का सफर

छत्तीसगढ़ के रहने वाले इस अभ्यर्थी (नाम - अभिषेक डहरिया) के लिए यह सफर आसान नहीं था। साल 2018 में जब उन्हें कैंसर का पता चला, तो पैरों तले जमीन खिसक गई थी। जहाँ लोग ऐसी स्थिति में हार मान लेते हैं, वहीं अभिषेक ने इसे एक चुनौती की तरह लिया। कीमोथेरेपी के दर्दनाक सेशन, सर्जरी और लंबे इलाज के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अस्पताल के वार्ड अक्सर उनके लिए स्टडी रूम बन जाया करते थे।

तीसरे प्रयास में मिली 'सपनों की उड़ान'

अभिषेक ने दो बार पहले भी परीक्षा दी थी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और किस्मत ने साथ नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ तैयारी की। इस दौरान उन्हें कई बार शारीरिक और मानसिक कष्टों से गुजरना पड़ा, लेकिन उनके मन में एक ही लक्ष्य था—प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करना। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC की मेरिट लिस्ट में अपनी जगह पक्की कर ली।

परिवार बना सबसे बड़ा सहारा

अभिषेक अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और डॉक्टरों को देते हैं। उनके माता-पिता ने न केवल उनके इलाज के लिए अपनी जमापूंजी लगा दी, बल्कि हर पल उन्हें मोटिवेट भी किया। अभिषेक का मानना है कि कैंसर सिर्फ शरीर को तोड़ सकता है, इंसान के सपनों को नहीं। उनकी यह जीत उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी परेशानियों से घबराकर अपने लक्ष्य को छोड़ देते हैं।

सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ

जैसे ही अभिषेक की सफलता की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोग उन्हें 'असली फाइटर' कह रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और अन्य राजनेताओं ने भी उनकी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है। अभिषेक अब IAS/IPS बनकर सिस्टम में सुधार लाने और कैंसर पीड़ितों की मदद करने का सपना देख रहे हैं।