पत्रकार भी और बिजनेसमैन भी, बांग्लादेश में राणा प्रताप बैरागी की मौत ने खड़े किए कई अनसुने सवाल

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News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश में चल रही अराजकता के बीच खबरें तो बहुत आती हैं, लेकिन जब किसी की पहचान और उसके काम के बारे में पता चलता है, तो दर्द और बढ़ जाता है। राणा प्रताप बैरागी बांग्लादेश के झिनाईदह (Jhenaidah) जिले के रहने वाले थे। उनकी पहचान एक मेहनती बिजनेसमैन के तौर पर थी, लेकिन वह अंदर से एक पत्रकार भी थे जो समाज की बात सामने रखना जानते थे।

अचानक गायब हुए और फिर मिली खबर
खबरों के मुताबिक, राणा प्रताप बैरागी अचानक गायब हो गए थे। परिवार वाले उनकी सलामती की दुआ मांग रहे थे, लेकिन जब उनका शव बरामद हुआ, तो सबकी उम्मीदें टूट गईं। उनकी हत्या जिस क्रूर तरीके से की गई, उसने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि उनकी मौत उसी लहर का हिस्सा है जिसमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और समाज के प्रतिष्ठित लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

कौन थे राणा प्रताप?
राणा प्रताप न केवल स्थानीय मीडिया में सक्रिय थे बल्कि अपने बिजनेस के ज़रिये भी लोगों की मदद करते थे। एक पत्रकार होने के नाते वह सच बोलने का साहस रखते थे। शायद यही उनकी 'गलती' बन गई या फिर उनकी धार्मिक पहचान, जिसे दंगाइयों ने हथियार बना लिया। बांग्लादेश के बदलते हालात में राणा जैसे लोगों का जाना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि उस निष्पक्ष आवाज़ का अंत है जो समाज को आईना दिखाती थी।

सवाल जो अब गूँज रहे हैं
आज हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर कब थमेगी यह हिंसा? एक व्यक्ति जो कलम और व्यापार के ज़रिये समाज की सेवा कर रहा था, वह नफरत का शिकार क्यों हुआ? बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

राणा प्रताप बैरागी की कहानी हमें याद दिलाती है कि नफरत की आग में सबसे पहले इंसानियत और बेगुनाह लोग जलते हैं। उनकी मौत के बाद अब बस न्याय की गुहार बची है।