दादरी के कुमारी मायावती कॉलेज ने रचा इतिहास बना यूपी का पहला राजकीय स्वायत्त कॉलेज अब खुद तय करेगा अपना सिलेबस
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यूजीसी (UGC) ने गौतम बुद्ध नगर के बादलपुर (दादरी) में स्थित कुमारी मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय को स्वायत्तता प्रदान की है। अब तक यह दर्जा केवल कुछ निजी या सहायता प्राप्त (Aided) कॉलेजों के पास था, लेकिन यह पहली बार है जब किसी शुद्ध सरकारी कॉलेज को यह शक्ति मिली है।
स्वायत्त कॉलेज (Autonomous College) होने का क्या मतलब है?
एक स्वायत्त कॉलेज को शैक्षणिक और प्रशासनिक मामलों में स्वतंत्रता मिलती है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
स्वयं का पाठ्यक्रम (Syllabus): कॉलेज अब आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार अपना खुद का सिलेबस तैयार कर सकेगा। उसे हर छोटे बदलाव के लिए विश्वविद्यालय (CCSU, मेरठ) पर निर्भर नहीं रहना होगा।
परीक्षा और परिणाम: कॉलेज अपनी परीक्षाएं खुद आयोजित करेगा और परिणाम घोषित करेगा। इससे सत्र (Session) देरी से चलने की समस्या खत्म होगी।
नए कोर्स: कॉलेज अपनी सुविधानुसार रोजगारोन्मुखी (Job-oriented) डिप्लोमा और डिग्री कोर्स शुरू कर सकेगा।
डिग्री: हालांकि डिग्री अभी भी संबद्ध विश्वविद्यालय (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) द्वारा ही प्रदान की जाएगी, लेकिन उस पर कॉलेज का नाम प्रमुखता से होगा।
इस सफलता के पीछे के मुख्य कारक
यूजीसी ने इस कॉलेज को स्वायत्तता देने से पहले कई कड़े मानकों पर इसकी जांच की थी:
NAAC ग्रेडिंग: कॉलेज के पास नैक (NAAC) द्वारा प्रदान की गई उच्च श्रेणी (A ग्रेड) है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेज में अत्याधुनिक लैब, डिजिटल लाइब्रेरी और शोध (Research) की उत्कृष्ट सुविधाएं मौजूद हैं।
एकेडमिक रिकॉर्ड: पिछले वर्षों में छात्राओं का शानदार परीक्षा परिणाम और प्लेसमेंट रिकॉर्ड।
उच्च शिक्षा मंत्री और प्राचार्य का बयान
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह अन्य राजकीय कॉलेजों के लिए प्रेरणा बनेगा। कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर दिव्या नाथ ने इस सफलता का श्रेय कॉलेज के स्टाफ की मेहनत और राज्य सरकार के निरंतर सहयोग को दिया।
छात्राओं को क्या फायदा होगा?
रोजगार के बेहतर अवसर: कॉलेज अब स्थानीय उद्योगों (जैसे नोएडा/ग्रेटर नोएडा की कंपनियां) के साथ मिलकर इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट कोर्स चला सकेगा।
समय की बचत: रिजल्ट और मार्कशीट के लिए अब छात्राओं को मेरठ (विश्वविद्यालय मुख्यालय) के चक्कर नहीं काटने होंगे।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: स्वायत्तता मिलने से कॉलेज को केंद्र सरकार से अधिक शोध अनुदान (Research Grants) मिलने की संभावना बढ़ गई है।