तूफ़ान 'डिटवा' का कहर: श्रीलंका रोया, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ; अब हमारे तटों पर अलर्ट
कुदरत का कहर जब बरपता है, तो सरहदें नहीं देखता। कुछ ऐसा ही मंजर हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका में देखने को मिल रहा है, जहाँ चक्रवाती तूफ़ान 'डिटवा' (Cyclone Ditwah) ने भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार (28 नवंबर) का दिन श्रीलंका के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। तेज हवाओं और बाढ़ ने वहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन राहत की बात यह है कि इस मुश्किल घड़ी में भारत एक बड़े भाई की तरह मदद के लिए खड़ा हो गया है।
श्रीलंका में तबाही का मंजर
शुक्रवार को आए इस तूफ़ान ने श्रीलंका में 56 लोगों की जान ले ली, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। हालात इतने ख़राब हैं कि कोलंबो के पास केलानी नदी के इलाके में "इतिहास की सबसे भयानक बाढ़" का डर सता रहा है। करीब 44,000 लोग सीधे तौर पर इससे प्रभावित हुए हैं। हजारों घर पानी में डूब गए हैं और लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में भाग रहे हैं।
भारत ने भेजा अपना 'समंदर का सिकंदर': INS विक्रांत
जब पड़ोसी मुसीबत में हो, तो भारत चुप कैसे बैठ सकता है? जैसे ही श्रीलंका ने मदद की गुहार लगाई, भारत ने 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की नीति अपनाते हुए तुरंत मदद भेज दी।
इस बार भारत ने मदद के लिए अपने सबसे ताकतवर विमानवाहक पोत INS विक्रांत को तैनात किया है। यह किसी भी राहत कार्य के लिए एक बहुत बड़ा कदम है। रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि तूफ़ान के बीच फँसे लोगों को बचाने के लिए INS विक्रांत के हेलीकॉप्टर्स और विमानों का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत ने इस मिशन को 'ऑपरेशन सागर बंधु' नाम दिया है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर श्रीलंका के लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा, "संकट की इस घड़ी में भारत पूरी मजबूती के साथ श्रीलंका के साथ खड़ा है। हम हर मुमकिन मदद करने को तैयार हैं।"
अब भारत के इन हिस्सों पर मंडरा रहा खतरा
श्रीलंका में तबाही मचाने के बाद, यह तूफ़ान अब शांत नहीं बैठा है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 'डिटवा' अब उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिणी राज्यों पर पड़ेगा।
कब और कहाँ होगा असर?
29 नवंबर की शाम से लेकर 30 नवंबर की सुबह तक का समय बहुत नाजुक है। यह तूफ़ान उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों के पास से गुजरेगा।
इसके चलते आंध्र प्रदेश के कई जिलों में 29 नवंबर से अगले तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश का अनुमान है। ख़ास तौर पर इन जिलों में रहने वालों को सावधान रहने की ज़रूरत है:
- चित्तूर
- तिरुपति
- नेल्लोर
- प्रकाशम
- वाईएसआर कडपा
मौसम विभाग ने साफ़ कह दिया है कि मछुआरे गलती से भी समुद्र में न जाएं, क्योंकि लहरें बहुत ऊंची उठ सकती हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
अगर आप या आपके कोई रिश्तेदार इन प्रभावित इलाकों में रहते हैं, तो कृपया अगले 2-3 दिन तक मौसम की ख़बरों से जुड़े रहें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।